आवारा कुत्तों को देख रोने लगता है हमले का शिकार हुआ मासूम
गोरखपुर। सहजनवां थानाक्षेत्र के डुमरी चौराहे और आसपास के इलाकों के लोग आवारा कुत्तों से डरे-सहमे हैं। दहशत इस कदर है कि बच्चों को घर से बाहर निकलने नहीं दे रहे हैं। यहां शुक्रवार सुबह आवारा कुत्ते ने घर के बाहर खेल रहे मासूम सुंदरम पर हमला कर घायल कर दिया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के समय बच्चा घर के बाहर खेल रहा था। तभी एक कुत्ते ने झपट्टा मारा और उसे घायल कर दिया। हमले में बच्चे के चेहरे और गर्दन पर गहरे घाव आए थे। डॉक्टरों ने कई टांके लगाए और रेबीज का पूरा टीका कोर्स शुरू किया। तीन दिन इलाज के बाद रविवार को डॉक्टरों ने बच्चे को डिस्चार्ज कर दिया। इस घटना ने इलाके के लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि प्रशासन सड़क और गलियों में आवारा कुत्तों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि मासूमों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
स्थानीय लोगों से बातचीत
उस दिन बच्चा खाली डिब्बे से खेल रहा था, तभी कुत्ता झपट पड़ा और घायल कर दिया। घटना स्थल के आसपास के लोग इस वारदात से बेहद चिंतित और सहमे हुए हैं।
राम मूरत राज
इस मौसम में आवारा कुत्ते झुंड बनाकर घूमते हैं, इस समय आवारा कुत्ते आए दिन लोगों पर हमला कर दे रहे हैं। हम लोग बहुत परेशान हैं।
चंद्रपाल, पड़ोसी
गांव के एक तरफ चौराहे के पीछे ताल और झाड़-झंखाड़ है, जहां कुत्ते और अन्य जानवर अक्सर छिप कर रहते हैं। यही कारण है कि बच्चे वहां खेलते समय कभी-कभी हमले का शिकार हो जाते हैं।
रवि राज, ग्रामीण
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बदले व्यवहार को झेल नहीं पाते पालतू कुत्ते, हो जाते हैं चिड़चिड़े
गोरखपुर। पालतू कुत्तों के प्रति लोगों के बदलते व्यवहार को लेकर पेट लवर्स ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अक्सर लोग कुत्तों के छोटे बच्चों को अपने घरों में पालतू बना लेते हैं लेकिन जैसे ही वे बड़े होते हैं, उन्हें घर से बाहर कर दिया जाता है। इस अचानक बदलाव से कुत्तों की मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ता है। कुछ कुत्ते अत्यधिक आक्रामक हो जाते हैं, जबकि कुछ डरपोक और चिड़चिड़े हो जाते हैं।
बशारतपुर निवासी नित्यानंद राय ने बताया कि वर्षा के समय इन कुत्तों को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता, जिससे उनकी भूख और मानसिक तनाव और बढ़ जाता है। इसके साथ ही वर्तमान में ब्रीडिंग का समय चल रहा है, जिससे कुत्तों में प्राकृतिक रूप से आक्रमकता और बढ़ जाती है। इन सभी कारणों से सड़क पर घूमने वाले कुत्तों में अचानक हिंसक व्यवहार देखने को मिल सकता है।
पेट लवर विकास सिंह ने नागरिकों से अपील की कि पालतू कुत्तों को जीवन भर प्यार और देखभाल दें। यदि किसी कारणवश उन्हें घर से बाहर करना पड़े तो स्थानीय एनजीओ या पशु आश्रयों से संपर्क कर उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। बरसात के समय विशेष रूप से भोजन और आश्रय सुनिश्चित करना भी आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मनुष्य के व्यवहार में बदलाव और मौसम की कठिनाइयों के कारण कुत्तों की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ रहा है। इसे ठीक करने के लिए कुत्तों के प्रति संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और लगातार देखभाल आवश्यक है।
आवारा कुत्तों को देने लगे भोजन तो बदला व्यवहार...नहीं हुए हमलावर
रुस्तमपुर इलाके के फुलवरिया में पिछले वर्ष एक कुत्ते ने एक परिवार के तीन लोगों पर किया था हमला
गोरखपुर। रुस्तमपुर इलाके के फुलवरिया में एक साल पहले एक कुत्ते ने एक ही परिवार के तीन लोगों पर हमला कर दिया था। इसमें एक बच्ची के चेहरे को गंभीर जख्म आए थे। इलाके में दो कुत्तों को लोगों ने मार दिया। इसके बाद दूसरे कुत्तों को भोजन देने लगे। कुत्तों को भोजन मिलने लगा तो उनकी आक्रमकता भी कम हो गई। एक साल में उन्होंने किसी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। हालांकि, उस घटना को याद कर अब भी लोग डर सहम जाते हैं।
पिछले वर्ष एक पागल कुत्ते से पूरा मोहल्ला सहमा हुआ था। अक्तूबर 2024 में उसने एक ही दिन में एक घर के तीन लोगों आयुष (11), शिवान्या (6) और नीतू (13) को काटकर जख्मी कर दिया था। उसी दिन एक अन्य युवक अजय (20) पर भी हमला कर दिया था। घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने इलाके में हमलावर हुए दो कुत्तों को मार डाला था। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब हम लोग बचा हुआ भोजन कुत्तों को दे देते हैं। इसकी वजह से ये लोगों को पहचानने लगे हैं और हमलावर नहीं होते।
शिवान्या की मां मुन्नी देवी ने बताया कि कुत्ते के काटने के बाद बेटी बहुत ही डर गई थी। तब वह अकेले स्कूल भी नहीं जा रही थी। हर रोज उसको स्कूल छोड़ने जाती और छुट्टी होने के बाद उसे लेने जाना पड़ता था। हालांकि, पागल कुत्ते की मौत के बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ है। अब छह महीने से कुत्ते के काटने की कोई घटना नहीं हुई है।
सावित्री देवी ने बताया कि पिछले वर्ष बेटी नीतू के ऊपर अचानक कुत्ता कूद गया था। वह नीचे गिर गई और उसके ललाट को नोंचने लगा था। भगवान का खैर है कि उसकी आंख नहीं फूटी। ललाट पर अभी भी चोट का दाग बना हुआ है। पिछले छह महीने से कुत्तों ने किसी पर हमला नहीं किया है। अब लोग इन कुत्तों को बचा हुआ भोजन देने लगे हैं जिससे इनकी भूख मिट जाती है।