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Gorakhpur News: दिल्ली से खरीदते हैं ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट, बिहार में भरते हैं चायपत्ती

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तिवारीपुर में पकड़ी गई नकली चायपत्ती को देवरिया का एक व्यक्ति मंगाता है
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दस रुपये एमआरपी, साढ़े तीन रुपये में खरीदकर 6 से 7 रुपये में थोक दुकानदारों को बेचते हैं धंधेबाज
गोरखपुर। मिलावटी के बाद नकली चायपत्ती का धंधा भी पूर्वांचल में गहरी जड़ें जमा चुका है। धंधेबाज दिल्ली से विभिन्न कंपनियों का रैपर मंगाते हैं और उसमें दाजर्लिंग से सस्ते रेट पर खरीदी गई चायपत्ती भरकर पूर्वांचल समेत प्रदेश व देश के दूसरे हिस्सों में भेज देते हैं। गोरखपुर में देवरिया का एक शख्स बिहार से हर दिन चायपत्ती की खेप मंगाता है और नौसड़ के पास बंधे पर गाड़ी खड़ीकर वहीं से बड़े दुकानदार को भेज देता है। 10 रुपये प्रति पैकेट की दर से बिकने वाली यह चायपत्ती थोक विक्रेताओं को 6 से 7 रुपये पीस के हिसाब से मिलती है। वहीं बिहार में जहां इसकी पैकिंग होती है, वहां साढ़े तीन रुपये प्रति पीस के हिसाब से मिलती है।
गोरखपुर और आसपास के जिलों में घरों के अलावा दुकानों पर भी चाय की खपत अधिक है। अलसुबह ही लोग दुकानों पर चाय पीने पहुंच जाते हैं। दुकानदार अधिक मुनाफा कमाने के लिए सस्ते रेट वाली चायपत्ती का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए मिलावटी और नकली चायपत्ती की बिक्री इस इलाके में खूब हो रही है। पिछले साल नवंबर में नौसड़ में मिलावटी चायपत्ती की बड़ी खेप पकड़ी गई थी। अब नकली चायपत्ती की खेप पकड़ी गई है। चायपत्ती के साथ पकड़े गए शख्स ने खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों को पूछताछ में बताया कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर आसानी से विभिन्न कंपनियों के रैपर (पैकेट) मिल जाते हैं। इस पर कंपनी के असली पैकेट पर छपी सारी जानकारी छापकर उसे पैक कर दिया जाता है। बड़ी कंपनियों का माल हर जगह आसानी से बिकता है, इसीलिए धंधेबाज इसे बड़े दुकानदारों तक पहुंचा देते हैं।
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जितना नामी ब्रांड, उतना आसान काम
नकली चायपत्ती का यह धंधा ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर ही अधिक होता है, क्योंकि इसकी बिक्री आसान होती है। बड़ी कंपनियां दिल्ली में सस्ते रेट पर थोक के भाव अपने उत्पाद के लिए पैकेट बनवाती हैं। धंधेबाज इसी का फायदा उठाते हैं। वे ब्रांडेड कंपनियों के पैकेट खरीद लेते हैं, जिसमें सस्ती चाय भरकर बेच देते हैं।
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10 रुपये वाली चायपत्ती में तीन रुपये कमीशन
शुरुआती छानबीन में पता लगा कि बिहार से गोरखपुर के लिए एजेंट को चायपत्ती तीन रुपये में मिलती है। वह यहां छह से सात रुपये में थोक विक्रेताओं को दे देता है। एक रुपये प्रति पैकेट मुनाफा रखकर थोक विक्रेता इसे फुटकर वाले को देते हैं। फुटकर विक्रेता इसे प्रिंट रेट 10 रुपये के हिसाब से बेचते हैं।
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फुटपाथ की दुकानों पर है सबसे अधिक खपत
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम पिछले दिनों रेलवे स्टेशन पर जांच के लिए गई तो वहां चायपत्ती की क्वालिटी पर शक गहराया था। पूछताछ करने पर दुकानदार ने ताजा ब्रांड वाली चायपत्ती दिखाई थी। इसके बाद से ही विभाग को शहर में नकली चायपत्ती बिक्री की आशंका थी। सोमवार को तिवारीपुर में जब चायपत्ती से भरे पिकअप को पुलिस ने रोका तो वहां पहुंची खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सबसे पहले बिल वाउचार मांगा। बिल वाउचर नहीं मिलने पर पैकेट पर दर्ज उत्पादन तिथि, मूल्य व अन्य जानकारियों की तस्दीक शुरू हुई।

पैकिंग से खुला खेल, अब नमूने से होगी पुष्टि
पकड़ी गई चायपत्ती के लॉट नंबर व अन्य जानकारी संदिग्ध होने पर ब्रुकबांड ताजा कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाकर पैकेट के पैकिंग की जांच कराई गई। कंपनी प्रतिनिधि ने बताया कि इस ब्रांड की चायपत्ती का पैकेट चारों तरफ से पैक होता है, जबकि पकड़ी गई चायपत्ती में तीन तरफ से पैकिंग है। इसके अलावा कुछ अन्य गोपनीय पहचान भी है, जिसे कंपनी ने अपनी जांच के लिए बनाया है। उसी गोपनीय तथ्यों के आधार पर कंपनी प्रतिनिधि ने पकड़ी गई चायपत्ती के नकली होने का दावा किया था।
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कोट
खराब चायपत्ती से होने वाले नुकसान
जनरल फिजिशियन डॉ. गौरव पांडेय बताते हैं कि चाय में कैफीन पाई जाती है, जो शरीर के लिए उत्प्रेरक का का काम करती है। इसकी अधिक मात्रा लिवर को प्रभावित करती है। इससे पाचन क्रिया पर असर बुरा असर पड़ता है। पिछले दिनों नौसड़ में जो चायपत्ती पकड़ी गई थी, उसमें चमड़ा रंगने वाला केमिकल था। ऐसा केमिकल लिवर पर अत्यधिक बुरा असर डालता है। इसलिए चायपत्ती की गुणवत्ता सेहत पर सीधा असर डालती है।
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