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Gorakhpur News: डीडीयू में शैक्षणिक कार्य बंद करने पर भड़के एनसएयूआई कार्यकर्ता, हिरासत में

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गोरखपुर। एबीवीपी के कार्यक्रम के लिए विश्वविद्यालय में शिक्षण कार्य बाधित करने का आरोप लगाकर एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने बृहस्पतिवार को आंदोलन की रणनीति बनाई थी। विश्वविद्यालय पहुंचने से पहले ही पुलिस ने उनको हिरासत में ले लिया। कुछ लोग विश्वविद्यालय तक पहुंचे तो पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए हिरासत में ले लिया। इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प भी हुई है। पुलिस ने जिले के विभिन्न थानों में 19 एनएसएयूआई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। बाद में उनको मुचलके पर छोड़ दिया गया।
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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन 22 से 24 नवंबर तक दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में होना है। बृहस्पतिवार को एनसएयूआई के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की जानकारी पर पुलिस सक्रिय हो गई। एनएसयूआई समेत कांग्रेस के कई सक्रिय कार्यकर्ताओं को पुलिस ने सुबह ही उनको घर से हिरासत में ले लिया। एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष सुशांत शर्मा समेत छह कार्यकर्ताओं को कोतवाली पुलिस, एनएसयूआई के नेता आदित्य शुक्ल को गोरखनाथ पुलिस ने घर से ही हिरासत में ले लिया। इस बीच एनएसएयूआई के पदाधिकारी व कार्यकर्ता विश्वविद्यालय गेट पर पहुंच कर प्रदर्शन करने लगे। इसकी जानकारी होते ही सीओ कैंट योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए उनको कैंट थाने उठा ले गई। इस दौरान पुलिस से उनकी झड़प भी हुई।
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विश्वविद्यालय गेट पर तैनात रही पुलिस
प्रदर्शन को देखते हुए पूरे दिन गोरखपुर विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर बड़ी संख्या में पुलिस तैनात रही। सीओ कैंट, कैंट इंस्पेक्टर विश्वविद्यालय का दौरा करते रहे।
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बड़हलगंज में एनएसएयूआई के प्रदेश अध्यक्ष को रोका
बड़हलगंज। गोरखपुर विश्वविद्यालय पर एनएसयूआई के प्रदर्शन में शामिल होने वाराणसी से गोरखपुर जा रहे एनएसएयूआई के प्रदेश अध्यक्ष ऋषभ पांडेय को पुलिस ने बड़हलगंज में रोक लिया। पुलिस ने उनको फोरलेन सड़क पर बड़हलगंज के पास उनके वाहन को रोक लिया। हिरासत में लेकर थाने ले गई। उनके साथ संदीप पाल, गौतम शर्मा व योगेंद्र पाल भी शामिल रहे। बड़हलगंज थाने पहुंचे ऋषभ पांडेय ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एबीवीपी के कार्यक्रम के चलते छात्रों की परीक्षा टाल दी। जो छात्र हाॅस्टल में रहते थे। उनको बाहर कर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं को रख दिया गया। छात्रों की समस्याओं के संदर्भ में गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलने जा रहे थे।
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