गोरखपुर। टीकाकरण के लिए बने यूविन पोर्टल के जरिए अब सरकारी के अलावा निजी अस्पतालों में भी बच्चों का टीकाकरण हो सकेगा। स्वास्थ्य विभाग के कोल्ड चेन से ही निजी अस्पतालों को भी टीका उपलब्ध कराया जाएगा। बच्चों को टीका लगाने पर अस्पताल न्यूनतम खर्च ले सकेंगे। रविवार को स्वास्थ्य विभाग और पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के बीच बैठक होगी। इस व्यवस्था के लागू होने से टीकाकरण की शत प्रतिशत रिपोर्टिंग होने लगेगी।
छोटे बच्चों को डायरिया, डिप्थीरिया, पोलियो, पीलिया, टीबी, टिटनेस, इंफ्लुएंजा, निमोनिया, मीजिल्स, रुबेला, इंसेफलाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण ही विकल्प है। बच्चों को 12 प्रकार की गंभीर जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए पांच वर्ष में सात बार नियमित टीकाकरण होता है। सरकारी अस्पतालों में टीके मुफ्त में लगाए जाते हैं, निजी अस्पतालों में इसके लिए महंगा शुल्क देना पड़ता है। निजी अस्पतालों में टीकाकरण से लोग परहेज करते हैं। अब यह उपाय किया जा रहा है कि यूविन पोर्टल पर पंजीकरण के जरिए निजी क्षेत्र में भी टीका लगाया जाए। इस पर चर्चा के लिए रविवार को स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पताल संचालकों के बीच एक बैठक होनी है। अगर सुब कुछ ठीक रहा तो निजी अस्पतालों में यह व्यवस्था जल्द ही लागू कर दी जाएगी।
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. नंदलाल कुशवाहा ने बताया कि टीकाकरण के लिए यूविन पोर्टल की सुविधा लागू होने के बाद अब निजी अस्पतालों में भी सरकार की तरफ से टीका उपलब्ध कराने का निर्देश मिला है। अस्पताल संचालकों को केवल टीका लगाने का न्यूनतम खर्च (सिरिंज की कीमत व पारिश्रमिक) ही लेना होगा। जिले में यूविन पोर्टल के जरिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एक वर्ष तक के करीब 1.84 लाख बच्चों, एक से पांच वर्ष तक के 79,152 बच्चों, 62,858 गर्भवती और 10,594 किशोर किशोरियों का टीकाकरण किया जा चुका है।
पंजीकृत नंबर पर छह बार भेजा जा रहा रिमाइंडर
प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि लाभार्थी खुद भी यूविन पोर्टल पर स्लॉट बुक कर नजदीकी केंद्र पर जाकर टीकाकरण करा सकते हैं। अब तक करीब 21 हजार नवजात शिशुओं को प्रसव केंद्रों पर ही जीरो डोज टीकाकरण की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। कोई भी बच्चा जिस दिन यूविन पोर्टल पर पंजीकृत होता है उसी दिन जन्मतिथि के अनुसार यूविन उसके सभी टीकों का डेट तय कर देता है। लाभार्थी के मोबाइल पर प्रत्येक बचे हुए टीके के लिए पंजीकृत नंबर पर छह बार रिमाइंडर भेजा जाता है। टीकाकरण सर्टिफिकेट भी लाभार्थी को ऑनलाइन मिल जाता है। इससे बच्चों के टीकाकरण से वंचित होने की आशंका कम हो जाती है।
पहचान पत्र भी साथ लाएं
लाभार्थी अपने मोबाइल नंबर के साथ-साथ अपना पहचान पत्र भी ले जाएं। एक बार मोबाइल नंबर और पहचान पत्र से रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद दूसरे जनपद और अन्य राज्यों में भी उस मोबाइल नंबर और पहचान पत्र से टीकाकरण कराया जा सकता है।