गोरखपुर। मोहद्दीपुर स्थित बहुमंजिली आवासीय व कॉमर्शियल अपार्टमेंट काव्यांजलि हाइट्स को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने नोटिस जारी कर सप्ताह भर में बकाया 1.53 करोड़ रुपये जमा करने को कहा है। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। काव्यांजलि हाइट्स अपार्टमेंट का निर्माण करने वाली फर्म श्री बांके बिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को मानचित्र स्वीकृत कराते समय प्रभाव शुल्क और भू-विभाजन शुल्क जमा न करने पर प्राधिकरण ने नोटिस जारी की थी, लेकिन रुपये जमा नहीं किए गए। ऐसे में दोबारा नोटिस जारी की गई है।
प्राधिकरण ने आठ अक्तूबर को वाद अनुभाग ने 76 लाख 28 हजार 706 रुपये सब डिवीजन फीस (भू-विभाजन शुल्क) और 76 लाख 93 हजार 613 रुपये इंपैक्ट फीस (प्रभाव शुल्क) ब्याज के साथ जमा करने के लिए निर्माणकारी फर्म बांके बिहारी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस दिया था। इस नोटिस में शुल्क का जिक्र किया गया, लेकिन ब्याज की धनराशि कितनी होगी स्पष्ट नहीं किया गया। इसके अलावा शुल्क जमा करने की कोई समय सीमा देने के बजाए सिर्फ यथाशीघ्र शब्द का इस्तेमाल था। शिकायतकर्ता सौरभ ने लोकायुक्त से की शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि सभी तरह की गड़बड़ियां सामने आने के बाद भी अभी तक प्राधिकरण ने बिल्डर का कंप्लीशन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट न तो निरस्त किया और न ही कोई अन्य कार्रवाई की। इस बीच 9 नवंबर को मुख्य अभियंता किशन सिंह की ओर से दी गई गई नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह अंतिम नोटिस है। सात दिन के भीतर ब्याज के साथ शुल्क जमा नहीं करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस बार की नोटिस में ब्याज की धनराशि जोड़ कर नहीं बताई गई है।
जेई रहते पत्नी की फर्म के नक्शे को प्रमाणित करने का आरोप
इस पूरे मामले की शिकायत शिकायतकर्ता सौरभ ने लोकायुक्त से भी की है। आरोप लगाया है कि काव्यांजलि हाइट्स का नक्शा तत्कालीन जेई अंगद सिंह ने ही प्रमाणित किया था, जबकि निर्माणकारी फर्म मेसर्स बांके बिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड की निदेशक उनकी पत्नी शैल सिंह थी। अंगद सिंह ने पत्नी की फर्म संचालन की बाबत प्राधिकरण से कोई अनुमति नहीं ली। 27 फरवरी 2013 को नक्शा पास कराने के लिए प्राधिकरण ने फीस जमा करने के निर्देश दिए थे, लेकिन तब भी बिना शुल्क जमा कराए 23 मई 2024 में नक्शा स्वीकृत किया गया। हालांकि, प्राधिकरण के अधिकारी आरटीआई के जवाब में बताया कि साल 2013 में हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के आधार पर फीस नहीं जमा कराई गई। लेकिन, 2016 में ही स्टे खत्म हो गया उसके बाद भी शुल्क जमा नहीं कराया गया।
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काव्यांजलि हाइट्स अपार्टमेंट बनाने वाली फर्म श्री बांके बिहारी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड को अंतिम नोटिस दी गई है। स्पष्ट चेताया गया है कि सात दिन के अंदर शुल्क जमा नहीं कराया गया तो नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, जीडीए