वर्ष 2015 में घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने दर्ज ने किया था केस
रेलवे बोर्ड के निर्देश पर हुई कार्रवाई, रेल प्रशासन ने नोटिस रिसीव कराकर किया कार्यमुक्त
2013 से 2015 तक सीपीआरओ के पद पर कार्यरत थे मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधक
गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य यात्री परिवहन प्रबंधक (सीपीटीएम) आलोक कुमार सिंह को रेलवे बोर्ड ने अनिवार्य सेवानिवृति दे दी है। बुधवार को रेलवे बोर्ड से आदेश मिलने के बाद देर शाम नोटिस रिसीव कराकर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया। वर्ष 2015 में सीपीआरओ पद पर रहते हुए आलोक सिंह पर एक विज्ञापन एजेंसी से घूस लेने का आरोप लगा था। इसी आरोप को आधार बनाकर सीबीआई ने केस दर्ज किया था। अब जल्द ही इस पद पर किसी नए अफसर को तैनाती दी जाएगी।
2000 बैच के आईआरटीएस (इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विसेस) अधिकारी आलोक कुमार सिंह देवरिया के रहने वाले हैं। उनकी पहली नियुक्ति 2001 में गोरखपुर में सहायक वाणिज्य प्रबंधक (टिकट जांच) के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने लखनऊ, गोरखपुर, इज्जतनगर सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। वह एनईआर में अप्रैल 2013 से अगस्त 2015 तक सीपीआरओ पद पर कार्यरत रहे।
बुधवार को दोपहर में रेलवे बोर्ड से आदेश आने के बाद रेल प्रशासन ने शाम तक नोटिस रिसीव करा दिया। नोटिस जारी होने के बाद रेलवे के एकाउंट और पर्सनल विभाग ने सेटलमेंट तैयार कर उन्हें कार्यमुक्त कर दिया। बोर्ड ने यह कार्रवाई धारा 56 जे के तहत की है। यह फैसला रेलवे में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
आलोक सिंह 19 फरवरी को 50 वर्ष के हुए थे और रेलवे ने क्लास वन के अधिकारी को भ्रष्टाचार में पाए जाने पर 50 वर्ष की उम्र में अनिवार्य सेवानिवृत्ति के नियम के तहत कार्रवाई की है।
इस तरह खुला भ्रष्टाचार का मामला
लखनऊ के हजरतगंज स्थित विज्ञापन एजेंसी के संचालक एसएस तिवारी ने एनईआर के महाप्रबंधक और विजिलेंस विभाग को पत्र लिखकर तत्कालीन सीपीआरओ आलोक सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि एजेंसी को कार्य दिलाने के नाम पर 2015 में सीपीआरओ ने रिश्वत ली थी। विभागीय कार्रवाई नहीं हुई तो एसएस तिवारी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भ्रष्टाचार से जुड़े दस्तावेज भेज दिए। इसके बाद जांच शुरू हुई। दस्तावेजों की पड़ताल कर सीबीआई की एसीबी शाखा ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। गोरखपुर और इसके बाद वाराणसी में आलोक सिंह की तैनाती के समय सीबीआई ने जांच पड़ताल की थी और दस्तावेज कब्जे में लिया था। अब रेलवे बोर्ड ने उन्हें जबरन सेवानिवृत्त करने का फैसला लिया।
इसके पहले तीन और अफसरों को दी गई थी अनिवार्य सेवानिवृत्ति
एनईआर में तीन और रेल अफसरों को इसके पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी। हालांकि, आलोक सिंह पूर्वोत्तर रेलवे के दूसरे सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड (एसएजी) अधिकारी और पूर्व सीपीआरओ हैं, जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते कार्यमुक्त किया गया है। इससे पहले मनोज कुमार सिंह को भी इसी तरह से हटाया गया था। वह भी भारतीय रेल यातायात सेवा (आईआरटीएस) के अधिकारी थे और 2002 से 2007 तक सीपीआरओ रह चुके थे। उन पर लखनऊ में सीनियर डीसीएम रहते हुए स्टेशन की आय का पैसा अपने पास रख लेने का आरोप लगा था। आरोप है कि वह स्टेशन पर टिकट बिक्री से हुई आय को शेयर मार्केट में लगाते थे। वहीं, मुख्यालय में ईडीपीएम सेल में तैनात क्लास टू के अफसर एके सिन्हा और एनईआर के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक को सितंबर 2023 में उपकरणों की खरीद में घोटाले के आरोप में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था और फिर इन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दिया गया था।