बुधवार के बाद बदलेगा माहौल, बृहस्पतिवार से हो सकती है बारिश
30 जून के बाद नहीं हुई अच्छी बारिश, तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार
गोरखपुर। पूर्वांचल में तय तारीख (18 जून) को आया मानसून कमजोर पड़ गया है। ट्रफ लाइन के पूर्वी यूपी के दक्षिणी भाग (सोनभद्र) में चले जाने से गोरखपुर-बस्ती मंडल में बारिश नहीं हो रही है। अभी तीन से चार दिन तक यही स्थिति बने रहने के आसार हैं। बृहस्पतिवार से बारिश की उम्मीद है।
इस साल विशेषज्ञ मौसम का सही आकलन नहीं कर पा रहे हैं। उम्मीद थी कि मई-जून में तपन बढ़ेगी। वहीं बरसात में पूर्वी यूपी में औसत से अधिक बारिश होगी। इसके विपरीत मई के अंतिम सप्ताह में पिछले वर्ष की अपेक्षा करीब 150 गुना अधिक बारिश हुई। अधिकतम तापमान गिरकर 32 डिग्री सेल्सियस तक आ गया। इसके बाद जून के पहले सप्ताह में बारिश नहीं हुई। लोग तेज गर्मी से बेहाल हो गए। हीट वेब का अलर्ट जारी हो गया। इसके बाद 12 जून को अचानक मौसम बदला और दो दिन अच्छी बारिश हुई। इससे एक बार फिर गर्मी से परेशान लोगों को राहत मिली। 18 जून को गोरखपुर मानसून पहुंचा तो एक बार फिर उम्मीदें अच्छी बारिश की हुईं। मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी के साथ हाई अलर्ट भी जारी किया, लेकिन बारिश नहीं हुई।
उमसभरी गर्मी से परेशान लोगों को जून के अंत में 29 व 30 जून को राहत मिली। दो दिन में करीब 50 एमएम बारिश हुई। वहीं ठंडी हवा का भी जोर रहा, जिससे अधिकतम तापमान घटकर 35 डिग्री सेल्सियस से नीचे आया। एक बार फिर सभी ने मानसून सक्रिय होने और आगे अच्छी बरसात की उम्मीद पाली। लेकिन, इस बार भी मौसम ने गच्चा दिया और जुलाई का पहला सप्ताह सूखा निकल गया। एक जुलाई से 06 जुलाई के बीच गोरखपुर- बस्ती मंडल में कुल मिलाकर भी 20 एमएम से कम बारिश हुई है। इसका असर धान की रोपाई पर पड़ा है।
मौसम विज्ञानी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि ट्रफ लाइन के दक्षिणी पूर्वी यूपी में होने की वजह से ही गोरखपुर-बस्ती मंडल में बारिश नहीं हो रही है। अभी तीन से चार दिन तक इसी तरह का मौसम रहेगा। बृहस्पतिवार से बाद मौसम में बदलाव आएगा।
एक सप्ताह बारिश नहीं हुई तो धान की खेती होगी प्रभावित
धान उत्पादक किसान विंदेश्वरी सिंह का कहना है कि जून-जुलाई की बारिश खेती के लिए लाभप्रद होती है। जून के अंतिम सप्ताह व जुलाई के पहले सप्ताह में धान की रोपाई होती है। इन दिनों अच्छी बारिश से किसानों को अपने खेत में पानी के लिए पंपिंग सेट का सहारा नहीं लेना पड़ता, जिससे खेती की लागत घटती है। धान के खेत में पानी भरा होने से खर पतवार कम होते हैं, जिसका फायदा फसल को तो मिलता ही है, किसान का खर्च भी घटता है। बारिश नहीं होने से किसानों की लागत बढ़ रही है।