प्रस्ताव को विद्या परिषद की 39वीं बैठक में मिल चुकी है मंजूरी
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने उच्च शिक्षा और शोध को नई दिशा देने की पहल की है। विश्वविद्यालय में सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी (सीआईएफ) सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। यह केंद्रीकृत सुविधा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों तक पहुंच उपलब्ध कराएगी।
इस प्रस्ताव को चार अक्तूबर को आयोजित विद्या परिषद की 39वीं बैठक में सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई। प्रस्ताव को अब प्रबंध बोर्ड की आगामी बैठक में अंतिम स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। सीआईएफ के संचालन के लिए एक वरिष्ठ शिक्षक को निदेशक नियुक्त किया जाएगा। इस सुविधा के माध्यम से महंगे उपकरणों का साझा उपयोग किया जा सकेगा, जिससे विभागों को अलग-अलग उपकरण खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे न केवल आर्थिक बचत होगी बल्कि उपकरणों के रखरखाव और उपयोग में भी पारदर्शिता बढ़ेगी। तकनीकी विशेषज्ञों की नियुक्ति से उपकरणों की कार्यकुशलता बनी रहेगी और दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि सीआईएफ की स्थापना से अंतर्विभागीय सहयोग को नई गति मिलेगी। इस सुविधा का उपयोग न केवल विश्वविद्यालय बल्कि उद्योग जगत भी कर सकेगा, जिससे कंपनियां अपने उत्पादों का परीक्षण कर पाएंगी। यह विश्वविद्यालय के लिए अतिरिक्त राजस्व का स्रोत बनेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। पिछले कुछ वर्षों में एमएमएमयूटी में शोध गतिविधियों में तेजी आई है और कई नई प्रयोगशालाएं स्थापित हुई हैं। अब सीआईएफ की स्थापना से विभागों के बीच समन्वय और संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होगा।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने कहा कि सेंट्रल इंस्ट्रुमेंटेशन फैसिलिटी की स्थापना एमएमएमयूटी के लिए मील का पत्थर साबित होगी। यह हमारे छात्रों और शोधकर्ताओं को विश्वस्तरीय शोध उपकरणों की सुविधा प्रदान करेगी और विश्वविद्यालय को वैश्विक शोध मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में मदद करेगी।