गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने बीटेक और बीबीए के छात्रों को प्रमोट किए जाने को लेकर अहम निर्णय लिए हैं। अब दोनों सेमेस्टर में 20 क्रेडिट भी विद्यार्थियों को मिलने पर वह अगले वर्ष में प्रमोट हो जाएंगे। नई शिक्षा नीति में लचीलेपन के प्रावधान को देखते हुए परिवर्तन का यह निर्णय लिया गया है। बुधवार को विद्या परिषद की बैठक में इसे मंजूरी मिल गई। अब 24 दिसंबर को प्रबंध बोर्ड की मुहर के बाद इसे वर्तमान सत्र से ही लागू कर दिया जाएगा।
एमएमएमयूटी में बुधवार को कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में विद्या परिषद की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। कुलसचिव चंद्र प्रकाश प्रियदर्शी ने विद्या परिषद का एजेंडा रखा। चर्चाओं के बाद विद्या परिषद ने करीब सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी।
एनईपी में चार वर्षीय बीटेक और बीबीए का पाठ्यक्रम 160 क्रेडिट का है। यानी हर वर्ष 40 क्रेडिट। अब तक प्रावधान था कि प्रथम वर्ष में 50 प्रतिशत क्रेडिट पाने पर विद्यार्थी द्वितीय वर्ष में प्रमोट हो जाते थे। लेकिन, तीसरे वर्ष में तभी प्रमोट किया जाता था, जब प्रथम वर्ष के सभी पेपर क्लीयर हों। इसी तरह चौथे वर्ष में भी तभी प्रमोट किया जाता था, जब दूसरे साल तक के सभी बैक क्लीयर हों। ऐसे में कई विद्यार्थियों का एक पेपर में भी बैक रह जाने पर प्रमोशन नहीं मिल पाता था। इसे देखते हुए यह बदलाव किए गए हैं। अब प्रथम वर्ष के किसी पेपर में भी बैक हो तो भी तृतीय या चतुर्थ वर्ष में प्रमोट होने में अड़चन नहीं आएगी। बशर्ते एक साल के दोनों सेमेस्टर में मिलाकर कुल 20 क्रेडिट विद्यार्थी ने अर्जित किए हों।
बैठक में कंप्यूटर साइंस विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. उदय शंकर ने पिछले पांच वर्ष में कंप्यूटर साइंस विभाग की प्रगति विषयक प्रस्तुति दी। बैठक में विद्या परिषद के सदस्य लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, एनएसयूटी के प्रो. बिजेंद्र सिंह, एमएनएनआईटी प्रयागराज के प्रो. डीएस कुशवाहा सहित समस्त विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता आदि उपस्थित रहे।
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बीबीए के लिए नए अध्यादेश को मंजूरी
बीबीए के चार वर्षीय पाठ्यक्रम के लिए नए अध्यादेश को भी मंजूरी मिल गई। बीबीए की नई पाठ्य संरचना एआईसीटीई की ओर से निर्धारित मॉडल करिकुलम पर आधारित है। इसमें छात्रों को न्यूनतम क्रेडिट पूरा करने के लिए लचीला बनाया गया है।
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बीटेक द्वितीय वर्ष के पाठ्यक्रम को मंजूरी
बीटेक द्वितीय वर्ष के क्रेडिट स्ट्रक्चर और सिलेबस को मंजूरी प्रदान की गई। विभिन्न विभागों की इस सेमेस्टर की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों की प्रगति आख्या का अवलोकन किया गया। विभागीय गतिविधियों के संवर्धन के लिए रचनात्मक सुझाव दिए गए। पीएचडी में नव प्रवेशित छात्रों के नामांकन को भी अनुमति प्रदान की गई।