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एमएमएमयूटी : छात्र-शिक्षक अनुपात होगा बेहतर, शिक्षकों की होगी भर्ती

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विश्वविद्यालय परिसर में छह करोड़ से बिछेगी नई पाइप लाइन
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प्रबंध बोर्ड की बैठक संपन्न, लिए गए कई अहम निर्णय
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रबंध बोर्ड की बैठक बुधवार को कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इसमें कई अहम निर्णय लिए गए। रिक्त पदों पर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किए जाने को भी बोर्ड ने मंजूरी दे दी। इससे विश्वविद्यालय में छात्र-शिक्षक अनुपात और बेहतर हो जाएगा।
विश्वविद्यालय परिसर में जलापूर्ति की व्यवस्था सुदृढ़ किए जाने के लिए नई पाइप लाइन बिछाने एवं एक ओवरहेड टैंक के निर्माण कराए जाने के प्रस्ताव को बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर 598.37 लाख रुपये खर्च होंगे। शिक्षकों रिक्त नियमित पदों को दोबारा विज्ञापित कर नियुक्ति किए जाने को भी मंजूरी मिल गई। विभिन्न विभागों में रिक्त संविदा शिक्षकों के पदों एवं उप पुस्तकालयाध्यक्ष पदों पर नियुक्ति के लिए पूर्व में निर्गत विज्ञापन के सापेक्ष कम आवेदन के कारण फिर से विज्ञापित किए जाने का निर्णय लिया गया। प्रबंध बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया कि पूर्व विज्ञापन के सापेक्ष जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन नहीं करना होगा, बल्कि उन्हें अपने पूर्व आवेदन में परिवर्तन या परिवर्धन का मौका मिलेगा। विधि अधिकारी के पद पर अनुबंध के आधार पर नियुक्ति किए जाने के लिए पारिश्रमिक की दरों एवं सेवा शर्तों को भी मंजूरी मिल गई।
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वहीं चार वर्षीय इंटीग्रेट टीचर्स एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) के शैक्षणिक सत्र 2025-26 से संचालन के लिए स्ववित्त पोषित योजना के तहत संविदा शिक्षकों के 16 पद (1 प्रोफेसर/ सह प्रोफेसर, 15 सहायक प्रोफेसर), अंशकालिक शिक्षकों के 3 पद एवं 3 लिपिकीय पद के सृजन को भी बोर्ड ने मंजूरी दे दी है। इसके लिए एक करोड़ 33 लाख 50 हजार रुपये के अनुमानित व्यय को भी मंजूरी मिल गई।
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देवेंद्र भट्ट बने परीक्षा नियंत्रक
प्रबंध बोर्ड की बैठक में परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति का लिफाफा खुला। परीक्षा नियंत्रक के रूप में देवेंद्र कुमार भट्ट नियुक्त किए गए। बोर्ड ने उनकी नियुक्ति की मंजूरी दे दी। विश्वविद्यालय में पहली बार किसी की पूर्णकालिक परीक्षा नियंत्रक के रूप में नियुक्ति हुई है। अभी तक यह दायित्व अतिरिक्त कार्यभार के रूप में किसी प्रोफेसर या एसोसिएट प्रोफेसर के पास होता था।
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