गोरखपुर। एसबीआई पादरी बाजार में वर्ष 2011 में कराई गई एफडी में खाता और लेजर संख्या न होने से भुगतान जांच प्रक्रिया में फंस गया है। हालांकि बैंक प्रबंधन के अनुसार गुलरिहा के उपभोक्ता को पूरी रकम ब्याज समेत मिलेगी लेकिन समय लगेगा। पासबुक पर कोई साक्ष्य न होने से जांच कई चरणों में होनी है इसलिए वक्त लगना है। जांच भी की जा रही है कि मैनुअल एफडी कराते समय यह चूक कैसे हुई।
गुलरिहा थाना क्षेत्र के जमुनहिया गांव निवासी जवाहिर साहनी और उनके माला रामसेवक ने 2001 में संयुक्त रूप से 23 हजार रुपये की फिक्स एफडी 84 महीनों के लिए कराई थी। आरोप है कि समय होने पर जब बैंक पहुंचे तो बैंक कर्मियों ने उन्हें टरका दिया और एफडी को ऑटो मोड में कर दिया। ताकि जब जरूरत हो, रुपये की निकासी हो जाए। दिसंबर में जवाहिर की बेटी की शादी थी। वह बैंक पहुंचे तो खाता संख्या और लेजर संख्या न होने पर बैंककर्मियों ने भुगतान से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने शाखा प्रबंधक से शिकायत की।
शाखा प्रबंधक विवेक तिवारी ने बताया कि उनकी रकम पूरी तरह से सुरक्षित है। हालांकि वर्ष 2001 में मैनुअल तरीके से एफडी होती थी। उस समय पासबुक पर खाता और लेजर संख्या का ध्यान नहीं दिया गया। 2005-06 में कंप्यूटर पर एफडी चढ़ाई गई थी। उस समय भी उपभोक्ता की एफडी नहीं चढ़ सकी है। अब जांच चल रही है, पूरा होने के बाद रकम ब्याज सहित उपभोक्ता को मिल जाएगी। बताया कि नाम और तारीख से डिटेल खोजने हैं। इसमें काफी प्रक्रियाएं हैं। इससे विलंब लगेगा।