गोरखपुर के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए दिल्ली की तरह गोरखपुर में भी हुनर हाट स्थापित हो सकता है। सर्किट हाउस में आयोजित बैठक में प्रदेश सरकार में वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने उद्यमियों के साथ बैठक में इस संभावना को तलाशा।
इस दौरान उद्यमियों ने बैंकों के प्रोसेसिंग फीस को लेकर शिकायत की तो मंत्री ने बैंक अधिकारियों को तलब किया। इसके साथ ही मंत्री ने उद्यमियों की मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने का आश्वासन भी दिया।
रविवार को सुरेश कुमार खन्ना और राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने उद्यमियों के साथ बैठक की। इस दौरान उद्यमियों ने अपनी समस्याओं से उन्हें अवगत कराया। उद्यमियों ने जिले में पांच विभागों के काम काज को लेकर असंतोष जाहिर की।
लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने कहा कि गोरखपुर में इंडस्ट्रियल स्टेट जिला उद्योग केंद्र के अंतर्गत आता है। इंडस्ट्रियल एरिया यूपीएसआईडीसी के अंतर्गत है तो वहीं विकास नगर एरिया जीडीए के तहत आता है। सहजनवां का औद्योगिक क्षेत्र गीडा है। नए बनने वाले इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को यूपीडा देख रहा है। उद्योग से संबंधित पांच विभाग और सबके नियम अलग-अलग हैं। विभागों में एकरूपता जरूरी है।
उद्यमियों ने कहा कि गोरखपुर का विद्युत विभाग का कार्यालय मोहद्दीपुर में है जो गीडा औद्योगिक क्षेत्र से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। ऐसे में गीडा क्षेत्र से संबंधित कार्यों के लिए गीडा स्थित सब स्टेशन से सभी विभागीय कार्य की व्यवस्था कराने की आवश्यकता है।
बैठक के दौरान उद्यमियों ने बैंकों के प्रोसेसिंग फीस को लेकर शिकायत की। उद्यमियों ने बताया कि सात से आठ लाख रुपये प्रोसेसिंग फीस के रूप में देना पड़ता है। मंत्री ने इसे गलत बताते हुए तत्काल बैंक अधिकारियों को तलब किया। देर रात तक चली बैठक में बैंक अधिकारियों को पूरी रिपोर्ट भेजने का मंत्री ने निर्देश दिया।
इसके पूर्व चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज और लघु उद्योग भारती की तरफ से दोनों मंत्रियों का शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। बैठक में चेंबर के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल, सनूप कुमार साहू, भोला जायसवाल, अशोक शाव, अचिंत्य लाहिड़ी, मनोज अग्रवाल, उमेश छापड़िया, रमाशंकर शुक्ला, लक्ष्मी शास्त्री आदि उपस्थित रहे।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज ने दिया ज्ञापन, यह हैं मांगें
- गीडा में दूसरे प्राधिकरणों से ट्रांसफर होकर आ रहे अधिकारी कम से कम तीन साल रहें
- इंडस्ट्रियल स्टेट में हथकरघा विभाग की लगभग 4,000 वर्गमीटर भूमि एवं जर्जर भवन है। यहां फ्लैटेड फैक्ट्री का निर्माण हो
- गीडा बोर्ड की बैठक में दो उद्यमियों को शामिल किया जाए
- महायोजना में औद्योगिक भू उपयोग की जमीन को बढ़ाया जाए
- औद्योगिक मानचित्रों में विकास शुल्क रियायती दर पर हो