नमकीन, पनीर, खोआ, बेसन के लड्डू में भी मिलावटी की पुष्टि
खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के लिए भेजे थे सैंपल
गोरखपुर। आयुर्वेद में औषधि करार दी गई हल्दी को भी मिलावटखोरों ने जहरीला बना दिया है। कैंपियरगंज से साबुत हल्दी के लिए गए नमूने की जांच में लेड क्रोमेट (शीशा) की पुष्टि हुई है। इसके अलावा पनीर के नमूने में मिल्क फैट दो प्रतिशत से भी कम पाया गया है। जबकि यह न्यूनतम 10 प्रतिशत होना चाहिए। मिठाइयों पर लगाई गई चांदी की पन्नी में भी मिलावटी मिली है।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अप्रैल और मई में दुकानों से लिए गए सैंपल को जांच के लिए भेजा था। जो छह रिपोर्ट मिली है, उसमें सभी ने कुछ न कुछ कमियां पाई गई हैं। सबसे बड़ा खतरा हल्दी को लेकर सामने आया है। भोजन को पौष्टिक बनाने वाली हल्दी में जो पीलापन है, यह उसकी शुद्धता की वजह से नहीं बल्कि रंग की वजह से आ रहा है। इस रंग में लेड क्रोमेट (शीशा) पाया गया है। इस तरह के हल्दी का इस्तेमाल व्यक्ति को कैंसर का मरीज बना सकती है।
खाद्य सुरक्षा विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रामस्वीट्स, फुलवरिया बाजार में चना नमकीन का सैंपल लिया गया था। इस नमकीन में खराब तेल का इस्तेमाल किया गया है, जिस वजह से इसे खाने योग्य नहीं माना गया है। इसमें गंदगी और बाहरी तत्वों की पुष्टि हुई है। आशंका है कि नमकीन जिस तेल में तला गया होगा, उसमें पहले कोई दूसरी खाद्य सामग्री भी पकाई होगी, जिसका अवशेष तेल में बचा होगा। वही नमकीन में चिपक गया होगा।
अग्रवाल कारखाना गोरखपुर शहर के प्रतिष्ठान से खोआ का नमूना लिया गया। इसमें फैट कंटेंट मानक से कम पाया गया। इसकी गुणवत्ता भी खराब पाई गई। कल्याण मिष्ठान भंडार से लिया गया पनीर का नमूना मानक के अनुसार नहीं मिला। इसमें जहां मिल्क फैट कम पाया गया, वहीं नमी मानक से अधिक मिली। इसका मतलब यह कि पनीर बनाने में पाउडर का इस्तेमाल किया गया और उसमें नमी के लिए पानी अधिक मिलाया गया होगा। इस वजह से पनीर का ठोस भाग भी कम पाया गया। शहर के ही एक और मिठाई की दुकान से लिए गए नमकीन का नमूना भी मानक के अनुसार नहीं मिला। इसमें भी बाहरी पदार्थ और गंदगी पाया गया। गोला क्षेत्र में मिठाई की दुकान से लिए गए बेसन के लड्डू का नमूना भी मानक के अनुसार नहीं मिला।
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लेड क्रोमेट एक विषाक्त पदार्थ
फिजिशियन डॉ. प्रशांत अस्थाना का कहना है कि लेड क्रोमेट एक विषाक्त पदार्थ है। यह कैंसर कारक पदार्थ माना जाता है। खाने में इसके आंशिक संक्रमण मात्र से पेट में दर्द, थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। इसके अलावा लेड क्रोमेट के कणों की वजह से श्वसन समस्याएं होती हैं। इसके त्वचा और आंखों के संपर्क में आने से भी दिक्कत होती है। इसी तरह मिठाई पर सिल्वर पेपर लगा होना भी नुकसानदेह है। सिल्वर की मात्रा मानसिक अवसाद व चिंता का कारण बनती है।