गोरखपुर। माॅडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली में फिटर पद पर फर्जी नियुक्ति की जांच करने दिल्ली से आई सेंट्रल विजिलेंस टीम ने अब छह सालों में हुई सभी भर्तियों की जांच शुरू की है। सूत्रों की मानें तो भर्ती प्रक्रिया से जुड़ीं 280 फाइलें लेकर टीम मंगलवार रात रवाना हो गई। इन फाइलों में सभी अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड हैं। वहीं, पूरे प्रकरण की जांच स्थानीय विजिलेंस की चार टीमें करेंगी। जांच में कई और रेलकर्मी फंस सकते हैं।
रेलवे बोर्ड ने नियुक्ति में फजीवाड़े की पुष्टि होने पर रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर के चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी को निलंबित कर मुख्य कार्मिक अधिकारी, प्रशासन अवधेश कुमार को अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। इसके बाद सेंट्रल विजिलेंस की टीम को भेजकर जांच शुरू करा दी। दो दिन रहकर टीम के तीन सदस्यों ने पहले तो फिटर पद के पैनल में शामिल अभ्यर्थियों के दस्तावेज खंगाले और इसके बाद वर्ष 2018 से जितनी भी नियुक्तियां हुई हैं, उनके रिकॉर्ड की जांच की। सभी दस्तावेजों की स्कैन काॅपी टीम अपने साथ ले गई है। मूल कॉपी आरआरबी कार्यालय में ही रखी गई है।
चार टीमें जुटाईं, फिर आ सकती है सेंट्रल विजिलेंस
सूत्रों की मानें तो बुधवार को विजिलेंस अधिकारियों ने बैठक कर स्थानीय स्तर पर चार टीमें बनाई हैं, जो मामले की जांच में जुटाई गई हैं। रिपोर्ट सेंट्रल विजिलेंस टीम को भेजा जाएगा। रिपोर्ट की समीक्षा के बाद सेंट्रल विजिलेंस की टीम फिर से आ सकती है।
तकनीशियन भर्ती की भी होगी जांच
पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2018 में कुल 1588 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे गए। इसमें करीब 745 पद तकनीशियन ग्रेड और बाकी पदों पर नाॅन तकनीशियन ग्रेड की भर्ती होनी थी। भर्ती की प्रक्रिया तभी से चल रही है। रेल कोच फैक्टरी, रायबरेली में नियुक्ति के लिए सात पदों पर फिटर पद सृजित गए थे। इसी प्रकार वर्ष 2022 में सहायक लोको पायलट और तकनीशियन की भर्ती की भी जांच अब शुरू हो गई है।