फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: सब पंचन को बिना बताए....गोलोक चले गए जुगानी भाई

विज्ञापन
विज्ञापन
नहीं रहे भोजपुरी व हिंदी के साहित्यकार रवींद्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई
विज्ञापन




पूर्वी उत्तर प्रदेश के खेत खलिहानों तक लगभग तीन दशक तक गूंजता रही जुगानी भाई की आवाज



आकाशवाणी से भोजपुरी में प्रसारित कार्यक्रमों में बतौर उद्घोषक बनाई थी विशिष्ट पहचान



गोरखपुर। आकाशवाणी के लोकप्रिय उद्घोषक और भोजपुरी व हिंदी के साहित्यकार रवींद्र श्रीवास्तव “जुगानी भाई” का 83 साल की उम्र में शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में इलाज चल रहा था। जिले के पंचगांवा (भवाजीतपुर) निवासी जुगानी भाई के निधन से उनके श्रोताओं और साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनका अंतिम संस्कार दोपहर बाद राजघाट पर किया गया।



आकाशवाणी के स्थापना काल 1972 से ही जुड़े जुगानी भाई ने 1983 तक सेवाएं दीं। आकाशवाणी को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। जुगानी भाई का जन्म 12 मई, 1942 को हुआ था। माता सरस्वती देवी और पिता सर्वदेव लाल श्रीवास्तव के इस होनहार पुत्र ने प्राचीन इतिहास में परास्नातक की डिग्री हासिल की थी। उनका विवाह कामिनी श्रीवास्तव से हुआ था। ''''''''जुगानी भाई '''''''' नाम उनको आकाशवाणी गोरखपुर के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरीराम द्विवेदी ने दिया था।
विज्ञापन




आकाशवाणी गोरखपुर में बतौर कार्यक्रम अधिशासी अधिकारी के रूप में पदास्थापित रहे जुगानी भाई की कई कविताएं विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में सम्मिलित हैं। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की ओर से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर शोध संपन्न किया जा चुका है। वह लंबे अरसे तक भोजपुरी के उत्थान के लिए विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में लिखते रहे।



राजघाट पर अंतिम संस्कार के समय प्रो. अरविंद त्रिपाठी, प्रो. चित्तरंजन मिश्र, प्रो. अनन्त मिश्र, प्रो. रामदरश राय, प्रो. कुमार हर्ष, राकेश सिंह पहलवान, डाॅ. फूलचंद प्रसाद गुप्त समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।







‘जुगानी भाई’ की प्रकाशित कृतियां



जुगानी भाई की प्रकाशित कृतियों में मोथा अउर माटी (काव्य-संग्रह), गीत गांव-गांव (काव्य-संग्रह), नोकियाति दुबि (काव्य-संग्रह), अखबारी कविता (काव्य संग्रह), फुन्सियात सहर (काव्य-संग्रह), अगली बगली (गद्य-संग्रह), खिरकी त खोलों (काव्य-संग्रह) लेट द विंडो बी ओपेंड (अंग्रेजी अनुवाद), भोजपुरी कवितई कऽ पंचामृत (काव्य-संग्रह), ई कइसन घवहा सन्नाटा (काव्य-संग्रह), गोरखपूरियत के बहाने (गद्य-संग्रह), अबहिन कुछ बाकी बा (भोजपुरी काव्य संग्रह), कलम बना के बांसुरी (काव्य-संग्रह) आ भोजपुरी क बेटा (मानग्रंथ) शामिल हैं।



-



‘जुगानी भाई’ को प्राप्त सम्मान



‘जुगानी भाई’ को संस्कार भारती सम्मान-2001, लोक भूषण सम्मान-2002. भोजपुरी-रत्न सम्मान लखनऊ-2004, भोजपुरी वैभव सम्मान दिल्ली-2005. लोकरत्न सम्मान (गुरुहनुमान संस्थान), भोजपुरी विभूषण सम्मान मुम्बई-2005, चेतना कवि सम्मान-2006, सरयू रत्न सम्मान-2011, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा राहुल सांकृत्यायन सम्मान-2012, भिखारी ठाकुर सर्जना सम्मान-2015, लोक भूषण सम्मान-2017. श्यामनारायण पांडेय कविता सम्मान मऊ-2013, विद्यानिवास मिश्र लोक कवि सम्मान वाराणसी-2014, यायावरी शिखर सम्मान-2023 आदि से सम्मानित किया गया था
विज्ञापन




-



आज भी कानों में गूंजती है- पंचों! जय जवान-जय किसान



गोरखपुर। जुगानी भाई के निधन से विभिन्न दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी है। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा कि गोरखपुर आकाशवाणी से गूंजने वाली आवाज ''''पंचों! जय जवान-जय किसान'''' आज भी कानों में गूंजती है। गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम सिंह, बसपा नेता ओमनारायण पांडेय एवं राजद के प्रदेश सचिव गौतम लाल श्रीवास्तव ने कहा कि जुगानी भाई भोजपुरी भाषा के सम्राट थे। उनके निधन से भोजपुरी जगत में जो रिक्तता आई है, उसे भरा जाना संभव नहीं है। आकाशवाणी गोरखपुर से सायंकाल जुगनी भाई के कार्यक्रम का लोग बहुत बेसब्री से इंतजार करते थे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें