खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने अब दाल में मिलावट की जांच शुरू की है। दाल में प्रतिबंधित दाल खेसारी की मिलावट से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। दाल में मिलावट पर छापा शुरू हुआ तो मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बुधवार सुबह महेवा मंडी में दस्तक दी तो उनके पहुंचने की खबर पल भर में मंडी में फैल गई। अधिकारियों ने महेवा मंडी में छापा मारा और गणपति ट्रेडर्स और मेसर्स रामवृक्ष पाल विजय कुमार की दुकान से दाल का सैंपल लिया, जबकि मेडिकल रोड की स्थित दाल की चार दुकानों से चार सैंपल लिया।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि दाल में मिलावट की जांच शुरू की गई है। दाल के छह सैंपल लिए गए हैं, जिसे जांच के लिए खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र कुमार, कमल नरायण, अंकुर मिश्रा, सतीश कुमार सिंह, विजय नंद सिंह, आशुतोष कुमार शामिल रहे।
छत्तीसगढ़ दाल उद्योग से खुली थी पोल
छत्तीसगढ़ दाल उद्योग संघ ने एक माह पहले दाल में मिलावट की पोल खोली थी। दाल के बड़े व्यापारियों ने मिलावटखोरों के खिलाफ जुर्माना लगाने और उसे प्रतिबंधित करने का निर्णय किया था। उसके बाद कई शहरों में दाल में मिलावट भी पकड़ी गई थी, हालांकि इस खुलासे के बाद गाेरखपुर में पहली बार दाल की दुकानों में छापा मारा गया है।
मिलावटखोर काली कमाई के लिए दाल में खेसारी मिलाकर बेच रहे हैं। दाल में मिलावट के साथ बिहार की फर्जी फर्मों के कागजात के आधार पर तस्करी भी की जा रही है। शुद्ध दाल का कारोबार करने वाले व्यापारी बताते हैं कि तस्करी और मिलावट से एक ट्रक में करीब 10 लाख रुपये मुनाफा कमाया जा रहा रहा है। हालांकि, छापा शुरू हुआ तो मिलावटखोर सतर्क हो गए हैं।