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Gorakhpur News: 75 वर्षों के रिकॉर्ड को सहेजें, ग्लोबल रैंकिंग में जगह बनाए विश्वविद्यालय

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गोरखपुर विश्वविद्यालय दीक्षा भवन में आयोजित हीरक जयंती समारोह के अवसर पर डाक कवर जारी करते सीएम
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सीएम योगी बोले-हमारी सभ्यता सबसे प्राचीन लेकिन शोध के विशिष्ट कार्य नहीं करने से हम पिछड़ते गए
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 75 वर्षों के रिकॉर्ड को सहेजें और ग्लोबल रैंकिंग में विश्वविद्यालय जगह बनाए। गोरखपुर विश्वविद्यालय में सोशल इंपैक्ट स्टडी, जिओ मैपिंग, फ्लड एक्शन प्लान और पुरातात्विक कार्य से जुड़े कुछ टिप्स देते हुए उन्होंने कहा कि यदि हम कार्य नहीं करेंगे तो पिछड़ जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने अशोक और चंद्रगुप्त की परंपरा में नालंदा से तक्षशिला को जोड़ने के लिए बनाए गए उत्तरपथ पर कौड़ीराम के सोहगौरा के होने की जानकारी देते हुए कहा कि हमारी सभ्यता सबसे प्राचीन है, लेकिन शोध के विशिष्ट कार्य नहीं किए गए और हम बिछड़ते गए।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के हीरक जयंती समारोह में सीएम योगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा को संहिताबद्ध करने वाले वेद व्यास का उद्धरण देते हुए कहा कि उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के लिए गुरु पूर्णिमा पर्व की शुरुआत हुई। यह गौरव की बात है कि आजाद भारत का पहला विश्वविद्यालय गोरखपुर में स्थापित हुआ। तब संसाधन नहीं थे, कनेक्टिविटी भी नहीं थी। इसके बावजूद कुछ लोगों ने विश्वविद्यालय की स्थापना का कार्य संभव कर दिखाया।
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो डिग्री कॉलेज देने वाले महंत दिग्विजयनाथ, कल्याण के संपादक भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार, सरदार सुरेंद्र सिंह मजीठिया, तत्कालीन जिलाधिकारी सुरति नारायण मणि त्रिपाठी, मधुसूदन दास, डॉ. एनके लाहिड़ी, पीसी चाको, पहले कुलपति प्रो. बीएन झा के योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी।


आने वाली पीढ़ी के लिए धरोहर रूप में संजोएं कार्यक्रमों, पब्लिकेशंस को

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय को अपनी 75 वर्ष की यात्रा के दौरान हुए कार्यक्रमों को धरोहर के रूप में संजोना चाहिए। आज तो डिजिटल का दौर है, ऐसे में किसी भी लिखित धरोहर पर दीमक लगने का भय भी नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अब तक की यात्रा में कितने पब्लिकेशन, शोध पत्र और नवाचार हुए, इसे आने वाली पीढ़ी के लिए संग्रहित करना होगा। इस परिप्रेक्ष्य में सीएम ने 1940 में गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित योगी शांतिनाथ की ‘प्राच्य दर्शन’ पर लिखी पुस्तक को संजोने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक की एक मात्र प्रति 1995 में गायब हो गई थी, लेकिन लगातार प्रयासों से अब उसे अयोध्या से प्राप्त कर लिया गया है। उस एक प्रति से अनेक प्रति का प्रकाशन सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे ही बहुत से लुप्तप्राय प्रकाशन हैं, जिन्हें संजोने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर दुख प्रकट किया कि सूचना क्रांति ने पुस्तक पढ़ने की परंपरा को कमजोर किया है।


जल्द बनेगा पांचवां विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना उस दौर में हुई थी, जब कनेक्टिविटी की स्थिति बेहद खराब थी। आज रोड, रेल और एयर, तीनों तरह की कनेक्टिविटी बेहद शानदार हुई है। आज गोरखपुर में चार विश्वविद्यालय, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, आयुष विश्वविद्यालय और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय हैं। जल्द ही गोरखपुर में फॉरेस्ट्री और हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय की स्थापना भी होने जा रही है। इसके अलावा गोरखपुर के बगल में कुशीनगर में महात्मा बुद्ध के नाम पर कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण चल रहा है।


सीएम योगी के मार्गदर्शन में आगे बढ़ रहा डीडीयू : सांसद
सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा गौरवशाली गोरखपुर विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा का उत्कृष्ट केंद्र बनाने की है। उनके मार्गदर्शन में यह विश्वविद्यालय निरंतर प्रगति पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सीएम योगी के निर्देश पर वह अपनी सांसद निधि से विश्वविद्यालय के लिए जरूरी कार्य कराने जा रहे हैं। यहां पर विद्यार्थियों को अन्य शहरों की तुलना में कम पैसे में अच्छी शिक्षा मिल रही है।

श्रेष्ठ ज्ञान से सशक्त राष्ट्र बनाना विवि का लक्ष्य
समारोह में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि अपनी स्थापना के 75 वर्षों में गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों के माध्यम से कई क्षेत्रों में मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने विश्वविद्यालय की प्रगति यात्रा में सीएम योगी के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभिन्न संस्थानों से अच्छी रैंकिंग प्राप्त करने वाले इस विश्वविद्यालय को यूजीसी ने कटेगरी-1 के विश्वविद्यालय की मान्यता दी है। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ ज्ञान से श्रेष्ठ मनुष्य और श्रेष्ठ मनुष्य से सशक्त राष्ट्र बनाने का लक्ष्य हासिल करने को यह विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधायक विपिन सिंह, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल, पोस्ट मास्टर जनरल गौरव श्रीवास्तव, हीरक जयंती समारोह समिति की प्रो. नंदिता सिंह, प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा, प्रो. निखिल कांत शुक्ला भी उपस्थित रहे।


सीएम ने किया महंत दिग्विजयनाथ प्रेक्षागृह का शिलान्यास
समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ प्रेक्षागृह का शिलान्यास किया। प्रेक्षागृह की क्षमता 1500 लोगों की होगी। शिलान्यास करने के बाद मुख्यमंत्री ने इसके लेआउट और ड्राइंग मैप का अवलोकन किया। उन्होंने कार्यदायी संस्था के अधिकारियों से निर्माण कार्य की समय सीमा के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने कहा कि 24 माह में प्रेक्षागृह बन जाएगा। इस पर मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया कि समय सीमा कम करते हुए इसका निर्माण 18 माह में पूर्ण किया जाना सुनिश्चित किया जाए। सीएम ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के हीरक जयंती द्वार का शिलान्यास और हीरक जयंती स्पोर्ट्स स्टेडियम के शिलापट्ट का अनावरण भी किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की 75 वर्ष की प्रगति यात्रा वर्णित करने वाली विशेष स्मारिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने 35 ग्राम के एक विशेष स्मृति सिक्के, डाक विभाग के सहयोग से निर्मित विशेष डाक टिकट और कवर का विमोचन और विश्वविद्यालय के सूचना, प्रकाशन एवं जनसंपर्क केंद्र की ओर से तैयार कराई गई डॉक्यूमेंट्री व थीम सॉन्ग का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के हाथों डॉ. अमित कुमार उपाध्याय, डॉ. कुशल नाथ तिवारी व यशवंत सिंह राठौड़ की पुस्तकों और अधिष्ठाता छात्र कल्याण की पुस्तिका संवाद का विमोचन भी हुआ।
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विशिष्ट पुरातन छात्रों को किया सम्मानित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय के विशिष्ट पुरातन छात्रों को सम्मानित किया। इनमें प्रख्यात साहित्यकार प्रो. रामदेव शुक्ल, बीएसएफ के डीआईजी रहे व कीर्ति चक्र से सम्मानित नरेंद्र नाथ धर दुबे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त निदेशक प्रवीण कुमार मिश्र, मुंबई में आयकर आयुक्त कृष्ण कुमार मिश्र, भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी वंदना त्रिपाठी, रियल एस्टेट डेवलपर शोभित मोहन दास और खगोल भौतिक विज्ञानी प्रो. दुर्गेश त्रिपाठी शामिल हैं। इनके अलावा संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयनित इकबाल अहमद और अन्नू गुप्ता की मंच से प्रशंसा की गई।
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