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Gorakhpur News: इंस्टाग्राम पर लगा रहा था सैड स्टेट्स...कोई भांप नहीं सका

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गुलरिहा इलाके में वॉलीबाल खिलाड़ी आदर्श सिंह की खुदकुशी का मामला
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प्रदेशस्तरीय प्रतियोगिताओं में ले चुका था हिस्सा, एक महीने से था गुमसुम



पिछले कुछ दिनों से सैयारा फिल्म के गाने भी लगातार सुन रहा था आदर्श



गोरखपुर। वॉलीबाल खिलाड़ी आदर्श सिंह पिछले कुछ समय से काफी उदास रहता था। इंस्टाग्राम पर आए दिन वह सैड स्टोरी (दुख भरी कहानी) भी लगाता था। हाल के दिनों में वह सैयारा फिल्म के गाने भी लगातार सुन रहा था। इसके बावजूद कोई उसकी भावनाओं को समझ नहीं सका। उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, पुलिस इसकी जांच में जुटी है।



संगम चौराहा स्थित शिवपुर सहबाजगंज में किराए का कमरा लेकर आदर्श सिंह रहता था। एक साल पहले उसने एमपी इंटर कॉलेज में प्रवेश लिया था और रीजनल स्टेडियम में वॉलीबाल की प्रैक्टिस करता था। बताया जा रहा है कि वह प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका था। वह काफी प्रतिभावान खिलाड़ी था।
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आदर्श के साथ प्रैक्टिस करने वाले दोस्तों का कहना है कि पिछले एक माह से वह थोड़ा दुखी था। पूछने पर कुछ बताता भी नहीं था। अक्सर वह इंस्टाग्राम पर दुखभरी स्टोरी लगाता था। आखिरी बार वह शनिवार को प्रैक्टिस करने आया था। रविवार को अभ्यास नहीं होता है।







मोबाइल गेम की भी थी लत



बताया जा रहा है कि आदर्श को ऑनलाइन गेम की भी लत थी। वह देर रात तक मोबाइल में गेम खेलता रहता था। रविवार रात भी वह गेम खेल रहा था। अगली सुबह बहन ने देखा तो वह फंदे से लटका हुआ था। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
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अचानक नहीं करता कोई खुदकुशी



डीडीयू गोरखपुर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. रश्मि रानी ने बताया कि आत्महत्या कभी अचानक नहीं होती है। यह एक प्रक्रिया है जिसमें मनुष्य के अंदर कई प्रकार के विचार आते-जाते रहते हैं। फिर वह होपलेस हो जाता है और खुद को असहाय महसूस करता है। कई बार मनुष्य खुद को कम आंकना शुरू कर देता है। उसके अंदर उदासीनता आ जाती है और वह किसी काम में रुचि नहीं लेता। उसे नींद कम आती है। कभी-कभी इंसान बहुत अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। उनमें मोटिवेशन की कमी होती है। वह इंसान अपनी प्रिय चीजें दूसरों को देना शुरू कर देता है। बात-बात में मरने जैसी बातें करता है। छात्रों को आत्म-विनाश या निराशावादी विचारों से ध्यान हटाने के लिए खुद को खोलने की आवश्यकता है। उन्हें अपनी भावनाओं के बारे में प्रेरणादायक दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करने और अपने मानसिक स्वास्थ्य को पोषित करने में मदद करने की जरूरत है। आत्महत्या को रोकने में व्यक्तित्व विकास की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या से पहले कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जिनपर ध्यान देने की जरूरत है। सही समय पर व्यक्ति की भावनाओं को समझ लेने से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
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