हनुमान प्रसाद पोद्दार ने स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई थी सक्रिय भागीदारी
गीता वाटिका में 18 सितंबर को मनाई जाएगी जयंती समारोह
मुख्यमंत्री हो सकते हैं शामिल, गीता वाटिका की ओर से की जा रही तैयारी
गोरखपुर। गृहस्थ संत भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार गीता प्रेस से निकलने वाली कल्याण पत्रिका के पहले संपादक रहे। अगले वर्ष कल्याण के शताब्दी अंक का प्रकाशन किया जा रहा है, जिसका विमोचन हरिद्वार में होगा। भाईजी की स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भागीदारी रही। उन्हाेंने गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाई और इसे अपने स्नेह से सींचा।
हनुमान प्रसाद पोद्दार की 133वीं जयंती 18 सितंबर को धूमधाम से मनाई जाएगी। इसे लेकर गीता वाटिका में अनुष्ठान शुरू किया गया है। जयंती कार्यक्रम मुख्यमंत्री योगी के सानिध्य में होगा। हनुमान प्रसाद पोद्दार स्मारक समिति के महामंत्री रसेंदू फोगला बताते हैं कि गीता वाटिका की स्थापना उन्हीं की देन है। गीता वाटिका परिसर स्थित कैंसर अस्पताल उन्हीं के वजह से बना।
रसेंदू फोगला ने बताया कि हनुमान प्रसाद पोद्दार का जन्म रतनगढ़, राजस्थान में 18 सितंबर 1892 को हुआ, लेकिन उन्होंने गोरखपुर को अपनी कर्मभूमि बनाई और इसे अपने स्नेह से सींचा। उन्हें प्यार से भाईजी कहा जाता था। उन्हाेंने बताया कि उनमें देशप्रेम कूट-कूट कर भरा था। परिवार की खराब आर्थिक स्थिति व अंग्रेजी हुकूमत की धमकियों से वह नहीं डरे। स्वतंत्रता आंदोलन में वह जेल भी गए। भाईजी की इच्छा पर सेठजी जयदयाल गोयंदका (गीताप्रेस के संस्थापक) की सहमति पर कल्याण पत्रिका निकालने की बात मान ली। भाईजी उसके पहले संपादक बने।
एकांत में कार्य के बाद साधना करने के लिए असुरन के पास साधना केंद्र बनवाया गया, जिसमें हनुमान प्रसाद पोद्दार ने साधना की थी। 22 मार्च 1971 में उन्होंने अंतिम सांस ली, तब से आज तक यहां हर साल हनुमान प्रसाद पोद्दार की जयंती का कार्यक्रम मनाया जाता है।