गोरखपुर जेल में बंद था आरोपी, छह माह पहले भेजा गया वाराणसी जेल
गोरखपुर। ठेकेदारी विवाद के चलते चार लोगों की हत्या के दोषी बलिया जिले के नवीन चतुर्वेदी की दया याचिका राज्यपाल ने खारिज कर दी है। यह मामला तीन जुलाई 2004 का है, जब बलिया जिले में पीडब्ल्यूडी ठीके को लेकर हुए विवाद में नवीन चतुर्वेदी और उसके आठ सहयोगियों ने राइफल और पिस्टल से गोलीबारी की। इस हमले में चार व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
27 नवंबर 2010 को बलिया के अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या-2) ने नवीन चतुर्वेदी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अब तक, वह 24 मई 2023 तक जेल में 17 वर्ष 7 माह 12 दिन की सजा और कुल 19 वर्ष 3 माह 8 दिन की सजा पूरी कर चुका है। वर्तमान में वह केंद्रीय कारागार वाराणसी में निरुद्ध है। हाल ही में, नवीन चतुर्वेदी के परिजनों ने उम्र ज्यादा होने का हवाला देते हुए समयपूर्व रिहाई की मांग की थी। हालांकि, जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक (बलिया) ने रिहाई का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि हत्यारोपित की रिहाई से समाज में खतरा उत्पन्न हो सकता है। इन तर्कों को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल ने उनकी दया याचिका अस्वीकार कर दी। जेल अधीक्षक दिलीप पांडेय ने बताया कि छह महीने पहले गोरखपुर जेल से नवीन चतुर्वेदी को केंद्रीय कारागार वाराणसी भेजा गया था, जहां वह अब बंद है।