इंश्योरेंस ठगी प्रकरण : गिरफ्तारी से पहले महत्वपूर्ण दस्तावेज किए गए गायब, डिजिटल साक्ष्य खंगाल रही पुलिस
प्राथमिक जांच में पुलिस को मिलीं बीमा क्लेम की सात फाइलें, डॉक्टर ने हस्ताक्षर से किया इन्कार
गोरखपुर। डिसेंट अस्पताल से जुड़े इंश्योरेंस ठगी प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे गंभीर और चौंकाने वाले कारनामे सामने आ रहे हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरफ्तारी से पूर्व विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव ने जानबूझकर ई-मेल आईडी और अस्पताल से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की। जांच अधिकारी के मुताबिक, ये छेड़छाड़ साक्ष्यों को नष्ट करने और जांच को गुमराह करने के उद्देश्य से किया गया है। फर्जीवाड़े से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी जानबूझकर गायब किए गए हैं।
पुलिस अब ई-मेल सर्वर, लॉग डिटेल, डेटा एक्सेस हिस्ट्री और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है। बीमा क्लेम से जुड़े जो दस्तावेज गायब किए गए हैं, उनकी सूची तैयार की जा रही है। साथ ही बीमा कंपनियों से रिकॉर्ड मंगवाकर दस्तावेजों का मिलान किया जा रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि किन-किन मामलों में फर्जीवाड़ा किया गया।
रामगढ़ताल थाना क्षेत्र स्थित डिसेंट हॉस्पिटल से जुड़े इंश्योरेंस ठगी के मामले में पुलिस ने रविवार को खोराबार बाईपास स्थित विद्यावती हॉस्पिटल के संचालक इंद्रेश यादव और उसके दो कर्मचारियों शाहपुर थाना क्षेत्र के माहनापुर सोनवा टोला निवासी अमन यादव उर्फ गौरव यादव और शाहपुर के सरस्वतीपुरम लेन नंबर तीन निवासी अभिषेक शर्मा उर्फ हनी शर्मा को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जब अस्पताल के अभिलेखों और फाइलों की गहनता से जांच पड़ताल की तो बीमा क्लेम से संबंधित सात फाइलें बरामद हुईं।
इन फाइलों की प्रारंभिक जांच में कई विसंगतियां सामने आई हैं। पुलिस को आशंका है कि इन फाइलों के आधार पर फर्जी या संदिग्ध तरीके से बीमा क्लेम प्रस्तुत कर आर्थिक लाभ उठाया गया है। रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि फाइलों में दर्ज इलाज, मरीजों का विवरण और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
डॉक्टर बोले-दस्तावेजों पर हस्ताक्षर मेरा नहीं
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने जब संबंधित दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि हॉस्पिटल कुशीनगर में एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत संविदा डॉक्टर नवाज आलम की एमबीबीएस की डिग्री के जरिये रजिस्टर्ड था। पुलिस ने जब डॉक्टर से संपर्क किया तो बीमा क्लेम संबंधित दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर इन्कार कर दिया। डॉक्टर ने बयान में बताया कि उनके नाम और पंजीकरण का दुरुपयोग किया गया है और बीमा क्लेम से संबंधित किसी भी दस्तावेज पर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं। डॉक्टर के इस बयान के बाद अस्पताल प्रबंधन और संचालकों की भूमिका और अधिक संदेह के घेरे में आ गई है।
पुलिस अब तक डिसेंट अस्पताल के संचालक समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। बीमा कंपनियों से फ्राॅड से संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं। जल्द ही अन्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।
- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट