गोरखपुर। गंगेश हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी (स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम) को बने करीब 15 दिन हो गए। केस में अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है, जिससे पूरी घटना से पर्दा उठ सके। एसआईटी ने अब लखनऊ में रहने वाले योगेश पांडेय हत्याकांड का केस देख चुके पूर्व अधिवक्ता को नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया है। वहीं एक करीबी के इंटरनेट कॉल का भी रिकॉर्ड निकालने का पुलिस प्रयास कर रही है। माना जा रहा है कि इससे घटना से जुड़ी कुछ अहम जानकारी मिल सकती है।
शुक्रवार को इस केस की जांच के संबंध में पुलिस गंगेश के घर गई थी। केस में वादी बनीं गंगेश की भाभी पुष्पा पांडेय से पुलिस ने पूछताछ की और उनका बयान लिया। इस दौरान 11 मई घटना वाले दिन के बारे में पुलिस ने उनसे जानकारी ली। पुष्पा से पूछा गया कि उस दिन कहां-कहां से कॉल आई थी, घर से गंगेश कब निकला था, उसने क्या खाया था। इसके अलावा भी कई सवाल पूछे गए। जिनके जवाब पुलिस ने नोट किए।
पुलिस की मानें तो गंगेश के एक करीबी ने घटना वाले दिन कई बार वाट्सएप कॉल किया था। उस व्यक्ति से पुलिस ने पूछताछ की है, लेकिन कोई विशेष जानकारी नहीं मिल पाई है। अब पुलिस उस व्यक्ति की वाट्सएप कॉल का रिकॉर्ड निकालने का प्रयास कर रही है। कितने देर बात हुई, कितने मैसेज किए गए समेत अन्य जानकारी जुटाने के लिए पुलिस साइबर विशेषज्ञ की मदद ले रही है।
यह है मामला
महेवा में रहने वाले गंगेश पांडेय के भाई योगेश की वर्ष 2017 में हत्या कर दी गई। इस मामले में मुख्य गवाह गंगेश था। गवाही के सिलसिले में वह मई के पहले सप्ताह में दिल्ली से गोरखपुर आया। 11 मई की सुबह 10.30 बजे केस के संबंध में बात करने घर से निकला। एक घंटे बाद गोलघर में उसकी मौत हो गई। परिजनों की तहरीर पर 13 जून को इस मामले में केस दर्ज हुआ। इसमें रिटायर्ड प्रोफेसर रामदरश राय, उनके बेटे राहुल राय, राहुल यादव, राहुल पांडेय, दीपनारायण पांडेय के साथ दो अधिवक्ताओं को भी आरोपी बनाया गया है। फोरेंसिक रिपोर्ट में जहर से गंगेश की मौत होने की पुष्टि के बाद एसएसपी ने केस की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।
वर्जन
इस मामले में जांच चल रही है। कुछ लोगों से पूछताछ होनी है, उन्हें नोटिस भेजकर बुलाया गया है। बहुत जल्द इस घटना का पर्दाफाश कर दिया जाएगा।
अभिनव त्यागी, एसपी सिटी