चिलुआताल थाना क्षेत्र का मामला, जिंदा रहते बेटे ने बनवाया मृत्यु प्रमाणपत्र
गोरखपुर। चिलुआताल क्षेत्र में एक बेटे ने अपने पिता को जिंदा रहते ही मार दिया। उसने साजिश रचकर पिता के जिंदा रहते और मरने के बाद दो मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाए। नगर निगम में शिकायत हुई तो जांच में मामला खुला। शादिक अली की तहरीर पर चिलुआताल पुलिस झुंगिया फतेहपुर निवासी कैलाश के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
शादिक ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि झुंगिया फतेहपुर निवासी राम भवन का 22 साल पहले 12 फरवरी 2003 को मृत्यु प्रमाणपत्र जारी किया गया। जबकि उनकी मौत वर्ष 2015 में हुई थी। फाइलों की जांच में यह प्रकरण सामने आया है। राम भवन का दो तिथियों में अलग-अलग सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। पहला मृत्यु प्रमाण पत्र छह फरवरी 2015 में जारी कराया गया। इसमें मौत की तिथि 12 फरवरी 2006 दिखाई गई थी। इसके बाद दूसरा प्रमाणपत्र एक मार्च 2020 को जारी कराया गया। इसमें मौत की तिथि 12 फरवरी 2003 दिखाई गई है। दोनों ही प्रमाण पत्र बेटे कैलाश ने भ्रामक और झूठी सूचना देकर जारी कराया है।
कारणों का लगाया जा रहा पता
नगर निगम की जांच में यह प्रकरण सामने आया है। एक ही व्यक्ति की मौत दो तिथियों में संभव नहीं है। इसके बाद जांच पड़ताल में कैलाश का नाम सामने आया है। इसके पीछे क्या कारण रहा होगा, इसका भी पता लगाया जा रहा है।
नगर निगम में होगी जांच
एक ही व्यक्ति का दो बार मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होने के मामले में नगर निगम की ओर से जांच कराई जाएगी। अपर नगर आयुक्त दुर्गेश मिश्रा ने बताया कि यह प्रमाणपत्र किसने और कब जारी करवाया। इसकी जांच की जाएगी। जो भी जिम्मेदार होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
बेटे ने एक प्रमाणपत्र निरस्त करने के लिए दिया था पत्र
पुलिस से पूछताछ में आरोपी कैलाश ने बताया कि उसने वर्ष 2023 में पत्र देकर एक प्रमाणपत्र निरस्त करने की मांग की थी। बताया कि पिता की मौत 2003 में हुई थी। इसका प्रमाणपत्र 2020 में बनवाया था। लेकिन, 2006 में मृत्यु दिखाकर किसने प्रमाण पत्र जारी करवाया, इसके बारे में जानकारी नहीं है। सीओ कैंपियरगंज विवेक तिवारी ने बताया कि नगर निगम के कर्मचारी की तहरीर पर चिलुआताल पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। अब पुलिस टीम यह जांच करेगी कि दो प्रमाणपत्र बनवाने के पीछे क्या कारण था। साथ में इसे जारी करते समय निगम के कर्मचारियों ने सत्यापन किया था या नहीं। इसके बाद साक्ष्य के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।