सीएमओ के फर्जी हस्ताक्षर से गोरखपुर के विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जो नियुक्तियां की गई हैं, उनकी कहानी और पेचिदा होती जा रही है। सिद्धार्थनगर की एक महिला को इस नियुक्ति के बारे में पता ही नहीं है, जबकि नियुक्ति पत्र पर सबसे पहला नाम उसी का ही है।
वहीं, कुशीनगर की दो महिलाओं के नाम व पते नियुक्ति पत्र पर जो दर्शाए गए हैं, वे वहां मिल नहीं रही हैं। नियुक्ति पत्र पर प्रदर्शित एक अस्पताल का नाम भी गलत दर्ज है। वहीं महराजगंज के युवक से पांच लाख रुपये ले लिए गए। अब परिवार वाले परेशान हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत किसी जालसाज ने तीन अलग-अलग नियुक्ति पत्रों पर 13 लोगों की तैनाती बतौर फॉर्मासिस्ट कर दी थी। इसकी जानकारी होने पर सीएमओ ने मंगलवार को सभी सीएचसी-पीएचसी प्रभारियों को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया कि यह नियुक्ति पत्र फर्जी है।
इस पर उनके फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। इस पत्र पर प्रदर्शित किसी को कहीं ज्वाइन न कराया जाए। इसके बाद शाम को एडिशनल सीएमओ की तरफ से मामले में कोतवाली में अज्ञात के खिलाफ केस भी दर्ज कराया गया। इस नियुक्ति पत्र पर प्रदर्शित नामों की बुधवार को पड़ताल की गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
कुशीनगर के डुमरी गांव की पुनीता चौहान पुत्री पारसनाथ का नाम 26 अक्तूबर को जारी नियुक्ति पत्र पर सबसे पहले है। इन्हें एक नवंबर तक अपनी तैनाती स्थल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहजनवां में ज्वाइन करना था। लेकिन डुमरी में पुनीता नाम की कोई लड़की नहीं मिली।
गांव वालों को इस नाम की लड़की के बारे में कोई जानकारी नहीं है। खजनी में नियुक्ति पाने वाली कुशीनगर के ही कप्तानगंज नगर पंचायत की रहने वाली अनुप्रिया दुबे का भी पता नहीं लगा।
11 नवंबर को जारी नियुक्ति पत्र पर जिस कुमारी शशिकला पुत्री रामचंद मौर्या निवासी बर्डपुर सिद्धार्थनगर का है। इनके नंबर पर कॉल किया गया तो पता लगा कि इन्होंने कहीं नौकरी के लिए आवेदन ही नहीं किया है। इनकी इलेक्ट्रानिक्स की दुकान है और घरवालों को अभी तक इसकी जानकारी नहीं है।
छह माह पहले गोरखपुर के युवक ने लिए थे पांच लाख रुपये
महराजगंज के निचलौल क्षेत्र अंतर्गत बहरौली गांव निवासी शादाब अली को 26 अक्तूबर को जारी पत्र में सीएचसी भटहट में तैनाती दर्शाई गई है। शादाब के पिता लतीफ ने बताया कि करीब छह माह पहले एक करीबी व्यक्ति के माध्यम से गोरखपुर के रहने वाले एक शख्स से मुलाकात हुई।
उस दौरान बेटे शादाब अली का स्वास्थ्य विभाग में फाॅर्मासिस्ट के पद पर नौकरी लगवाने के लिए झांसा दिया। उसने कई किस्तों में करीब पांच लाख रुपये भी लिए। समय समय पर नौकरी से संबंधित प्रक्रिया पूरी होते देख उन्हें जालसाजी की आशंका नहीं हुई। क्योंकि बेटे का फॉर्मासिस्ट पद के लिए नियुक्त पत्र भी जारी हो गया था, लेकिन बाद में सूचना मिली की नियुक्ति पत्र फर्जी है। बेटे की नौकरी लगवाने के लिए कर्ज और कुछ सामान गिरवी रखकर रकम दी है। संवाद