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Gorakhpur News: डॉक्टर ने विजिट की ही नहीं, बीमा कंपनियों से हो गई वसूली

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इंश्योरेंस ठगी : डॉ. एके सिंह का आरोप-मेरे नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया
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डॉक्टर ने अप्रैल में जिलाधिकारी और मई में मुख्य चिकित्साधिकारी से की थी शिकायत



पुलिस को सौंपे फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेज, शिकायत पर संचालकों ने डॉक्टर का रोक दिया था पेमेंट



गोरखपुर। इंश्योरेंस ठगी के मामले में डिसेंट हॉस्पिटल के संचालकों का एक और कारनामा सामने आया है। संचालकों ने जिस डॉ. एके सिंह के नाम से गोरखपुर और बस्ती के डिसेंट मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में मरीजों को फर्जी भर्ती दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये वसूले, वहां डॉक्टर कभी गए ही नहीं। यह बात डॉक्टर ने पुलिस को बताई है। डॉक्टर का कहना है कि उनके नाम और हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर प्रबंधन ने मरीजों की फर्जी भर्ती दिखाई और बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये का क्लेम हड़प लिया। डॉ. एके सिंह ने फर्जीवाड़े से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी विवेचक को सौंपे हैं।



तारामंडल के पाम पैराडाइज निवासी डॉ. एके सिंह ने पुलिस को बताया कि वह पिछले पांच साल से डिसेंट हॉस्पिटल से जुड़े थे। मरीजों को सुबह-शाम परामर्श देने पर प्रति मरीज 1000 रुपये का भुगतान उन्हें टीडीएस कटौती के बाद उनके खाते में ट्रांसफर होता था। शुरुआत में भुगतान नियमित रूप से मिला लेकिन पिछले तीन साल से बेहद कम रकम भेजी जा रही थी।
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इसी बीच उन्हें पता चला कि गोरखपुर के अलावा बस्ती में भी डिसेंट मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के नाम से अस्पताल संचालित हो रहा है। प्रबंधक ने यहां भी उनके नाम का दुरुपयोग किया। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि वह कभी बस्ती के अस्पताल में नहीं गए लेकिन इसके बावजूद वहां उनके नाम से मरीज भर्ती दिखाए गए और फाइलों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए।



डॉ. सिंह के मुताबिक, बजाज, एसबीआई, आईसीआईसीआई और स्टार हेल्थ जैसी प्रमुख बीमा कंपनियों में उनके नाम से फर्जी फाइलें बनाकर क्लेम कराया गया। जब बीमा विभाग से जुड़े डॉ. अमित श्रीवास्तव ने उन्हें कॉल कर कुछ फाइलें भेजीं तो हकीकत सामने आई। उन दस्तावेजों में उन्हें दोनों जगह एक साथ विजिट दिखाई गई थी।



नवंबर 2024 में डॉक्टर को मिली गई थी फर्जीवाड़े की जानकारी



नवंबर 2024 में जब उन्हें इस फर्जीवाड़े की जानकारी हुई तो उन्होंने हॉस्पिटल प्रबंधन से विरोध जताया। इसके बाद उनका भुगतान रोक दिया गया। इतना ही नहीं, पत्नी डॉ. ममता सिंह का भी भुगतान रोक दिया गया। डॉ. सिंह ने बताया कि उस समय उनके पास ठोस सबूत नहीं थे, इसलिए उन्होंने तत्काल कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। बाद में उन्होंने खुद मेहनत कर गोरखपुर और बस्ती दोनों अस्पतालों के मरीजों की बीएचटी (बेड हेड टिकट) की फोटो कॉपी जुटाई। इनमें उनके हस्ताक्षर कहीं भी नहीं पाए गए।
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अप्रैल में डीएम और मई में सीएमओ से की थी शिकायत



अप्रैल 2025 में उन्होंने जिलाधिकारी और मई 2025 में मुख्य चिकित्साधिकारी को पूरे मामले की जानकारी दी थी। अधिकारियों को सौंपे गए दस्तावेजों में मरीजों के नाम, पते और बीएचटी की प्रतियां शामिल हैं। डॉ. सिंह ने आशंका जताई है कि अस्पताल प्रबंधन ने योजनाबद्ध तरीके से उनके नाम और पहचान का इस्तेमाल किया और बीमा कंपनियों से मोटी रकम वसूली। इस मामले में अब पुलिस भी सक्रिय हो गई है। जांच के बाद ही यह साफ होगा कि बीमा कंपनियों से कितनी बड़ी रकम फर्जी तरीके से हड़पी गई और इसमें कौन-कौन शामिल है।
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