- ह्दय रोग और ईएनटी की ओपीडी में बढ़े मरीज
गोरखपुर। नवरात्र और प्रतिमा विसर्जन में डीजे के शोर ने शहरवासियों के दिल की धड़कनें बढ़ा दीं। शोर की वजह से सुबह तक लोगाें के कान गूंजते रहे। असर यह रहा कि शुक्रवार को कान में दर्द और सुनने में तकलीफ के साथ ही ह्दय रोगियों की संख्या ओपीडी में बढ़ गई।
दरअसल, प्रतिमा विसर्जन के दौरान तेज आवाज में डीजे बजाया गया। इस वजह से बुजुर्गों को काफी परेशानी हुई। शुक्रवार को एम्स की ओपीडी में ह्दय रोग के 124 मरीज पहुंचे। वहीं, ईएनटी विभाग में 107 मरीज आए। जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी मरीजों की संख्या बढ़ी रही। डॉक्टरों का कहना है कि ज्यादातर मरीज ऐसे थे जो शोर की वजह से परेशान थे।
केस 1
डीजे के शाेर की वजह से बसंतपुर इलाके के दिनेश जायसवाल के कान में दर्द होने लगा था। सुबह तक उनके कान में डीजे की आवाज ही गूंज रही थी। परेशान होकर वे डॉक्टर के पास पहुंचे। वहां चेकअप के बाद डॉक्टर ने दवा लिखी।
केस 2
असुरन इलाके के ब्रजेश मिश्रा हार्ट के मरीज हैं। दो दिनों तक तेज डीजे का आवाज सुनकर उनकी धड़कनें बढ़ गईं। इसके बाद उन्हाेंने डॉक्टर से रेगुलर चेकअप कराया।
डॉक्टरों की सलाह...
हृदय रोग से संबंधित मरीजों के लिए तेज आवाज काफी नुकसानदेह हो सकता है। तेज आवाज से मरीजों की धड़कनें तेज चलने लगती हैं। हृदय के मरीजों को नींद न आने से उनकी बीपी अनियंत्रित हो जाती है जिससे उनकी दिक्कतें बढ़ जाती है। आमतौर पर हृदय के मरीजों का वाल्व खराब हो जाता है और तेज आवाज के कारण उनकी धड़कनें बढ़ जाती हैं। डीजे की तेज आवाज से केवल हृदय रोगी ही नहीं बल्कि 50 की उम्र के अधिक के लोगों को भी दिक्कतें होती है। उनका बीपी अनियंत्रित हो जाता है।
- डॉ. रोहित गुप्ता, कॉर्डियोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल
डीजे की तेज आवाज कान की नस को प्रभावित करती है। इससे लोगों में धीरे-धीरे सुनने की क्षमता कम होने लगती है। तेज आवाज का सीधा प्रभाव कान के पर्दे पर होता है। कान में सबसे अधिक सुनने की क्षमता 100 डेसिबल तक होती है, उससे ज्यादा होने पर कान के लिए नुकसान देह हो सकता है। तेज आवाज के कारण मरीज ट्रामा के भी शिकार हो सकते हैं।
- डॉ. देवेंद्र मौर्य, ईएनटी रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल