गोरखपुर। पुरुवा हवा चलने पर तापमान में तीन दिन में छह डिग्री सेल्सियस की कमी और पछुवा हवा चलने पर दो दिन में छह डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी खतरनाक है। एम्स के विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप के चलते डिहाइड्रेशन होगा तो सिर दर्द, पेट दर्द ही नहीं, ब्लड प्रेशर भी लो होने की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा खाना खराब होने के चलते डायरिया और अन्य बीमारियां भी बढ़ती हैं। दोपहर 12 बजे से तीन बजे के बीच हीट वेव का भी असर होता है।
एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल ने बताया कि मौसम में बदलाव का शरीर पर असर कम से कम हो, इसके लिए जरूरी है कि खुद को हाईड्रेंट रखें। मतलब दिन भर लगातार पानी पीएं। ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) का उपयोग करें। नींबू पानी और छाछ जैसे घरेलू पेय पीते रहें। अपने आहार में उच्च जल सामग्री वाले मौसमी फल और सब्जियां शामिल करें। घर से बाहर निकलें तो हल्के रंग के ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनें और सिर को छाता, टोपी, गमछा आदि से ढंक लें।
एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यू वेंकटेश ने बताया कि भ्रम, मांसपेशियों में ऐंठन, दिल की धड़कन तेज होना, मतली और चक्कर आना गर्मी संबंधी बीमारियों का लक्षण है। हीटस्ट्रोक होने पर शरीर का तापमान उच्च होना, लाल और सूखी त्वचा और बेहोशी तक हो सकती है। ऐसे मौसम में शिशु, बच्चों, गर्भवती और बुजुर्गों के विशेष देखभाल की जरूरत होती है।