जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैज्ञानिक पहल, किसानों को भी मिलेगा लाभ
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय को जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए शोध परियोजना के लिए अनुदान मिला है। ''''ग्रीनहाउस गैसों को कम करने के लिए कार्बन खेती के माध्यम से कार्बन पृथक्करण'''' पर काम करने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की ओर से कुल 3.30 लाख रुपये की वित्तीय सहायता मिली है। यह परियोजना तीन वर्षों के लिए स्वीकृत की गई है।
शोध परियोजना पाने वाले वनस्पति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रामवंत गुप्ता ने बताया कि इसका उद्देश्य एक क्षेत्र-विशिष्ट, वैज्ञानिक रूप से आधारित कार्बन खेती मॉडल तैयार करना है, जो जैविक कार्बन पृथक्करण को बढ़ावा दे। परियोजना के तहत वायुमंडलीय कार्बन डाईआक्साइड की सांद्रता को कम कर मिट्टी के कार्बनिक स्तरों को बढ़ाने और टिकाऊ कृषि वानिकी प्रणाली बनाने पर काम किया जाएगा। परियोजना में सह-मुख्य अन्वेषक प्रो. दिनेश यादव, डॉ. मनीष प्रताप सिंह, डॉ. निखिल रघुवंशी और महायोगी कृषि विज्ञान केंद्र, पीपीगंज से डॉ. संदीप उपाध्याय भी शामिल हैं। कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बधाई देते हुए कहा कि यह शोध कृषि क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित होगी।
दो स्थानों पर संचालित होगी परियोजना
डीडीयू अनुसंधान समन्वय, विश्लेषण और मॉडल विकास के लिए केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा, वहीं पीपीगंज स्थित महायोगी गोरखनाथ केवीके ऑन-फील्ड कार्यान्वयन, किसान शिक्षा और प्रदर्शन परीक्षणों का समर्थन करेगा।