राजस्थान और मध्य प्रदेश में कफ सिरप से हुई मौतों के बाद यूपी में भी जांच तेज हो गई है। इसी मामले में लखनऊ में दो दिन पहले पकड़े गए कोडिनयुक्त कफ सिरप के बाद रविवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग की टीम ने भालोटिया मार्केट में दो दुकानों पर छापा मारा। हालांकि दोनों दुकानों से प्रतिबंधित कफ सिरप नहीं मिला। इसके बाद इन दुकानों से पांच साल में कोडिनयुक्त दवाओं की खरीद-बिक्री का रिकाॅर्ड मांगा गया।
इसमें से एक दुकान के गोदाम से पहले कफ सिरप पकड़ा जा चुका है। बाजार बंदी के दिन हुई इस कार्रवाई से कफ सिरप के विक्रेताओं में हड़कंप मच गया।
सहायक आयुक्त (औषधि) गोरखपुर मंडल पूरन चंद के नेतृत्व में सिद्धार्थनगर के औषधि निरीक्षक नवीन कुमार और कुशीनगर के औषधि निरीक्षक दीपक कुमार पांडेय ने आशीष मेडिकल एजेंसी और आशीष मेडिकल ट्रेडर्स की दुकान पर जांच की। जांच करने गई टीम का कहना है कि निरीक्षण के दौरान दोनों जगह किसी भी प्रतिबंधित या कोडिनयुक्त कफ सिरप की बिक्री या भंडारण नहीं पाया गया।
हालांकि, टीम ने दोनों फर्मों से पिछले पांच वर्षों के दौरान कोडिनयुक्त औषधियों के क्रय-विक्रय से संबंधित सभी अभिलेखों के कंप्यूटर प्रिंटआउट मांगे हैं। इन दस्तावेजों का सत्यापन और विस्तृत जांच की जाएगी ताकि किसी संभावित अनियमितता का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही दोनों दुकानों से दो कफ सिरप के नमूने भी परीक्षण के लिए एकत्र किए गए हैं।
ये नमूने लखनऊ स्थित राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला को भेजे जा रहे हैं। वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सामने दो दिन पहले ही तीन दुकानों से कफ सिरप के सैंपल लिए गए थे, उसकी भी जांच चल रही है।
पुराने मामलों की भी होगी जांच
गोरखपुर से कोडिनयुक्त कफ बिहार और नेपाल भेजने का धंधा बहुत पुराना है। अगस्त 2022 में गीडा थाना क्षेत्र में करीब दो करोड़ रुपये मूल्य का कफ सिरप पकड़ा गया था।
उस मामले में गोरखपुर के अलावा संतकबीरनगर जिले में भी केस दर्ज हुआ था। इसके बाद शहर के राप्तीनगर इलाके में भी एक दुकान से बड़ी मात्रा में कफ सिरप मिला था। लखनऊ में मामला पकड़े जाने के बाद अब चर्चा है कि पुराने मामलों की भी जांच कराई जाएगी।
लखनऊ में कफ सिरप पकड़े जाने के बाद शासन के निर्देश पर रविवार को भालोटिया मार्केट के दो दुकानों की जांच की गई। हालांकि, दोनों ही जगह प्रतिबंधित या कोडिनयुक्त कफ सिरप नहीं मिला। इससे पहले मेडिकल कॉलेज रोड पर भी दो दिन पहले जांच कराई गई थी। पुराने मामलों की भी छानबीन की जा रही है:
पूरनचंद, सहायक आयुक्त, खाद्य औषधि