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सर्किल रेट : नया मसौदा पेश, डीएम ने मांगी पड़ोसी जिलों की रिपोर्ट

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पड़ोसी जिलों के सर्किल रेट से मिलान के बाद शासन को भेजी जाएगी रिपोर्ट
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अब 10 से 15 फीसदी ही अंतर रहेगा सीमावर्ती गांवों के सर्किल रेट में
गोरखपुर। सीमावर्ती जिलाें के साथ ही तहसीलों की सीमा वाले गांवों में सर्किल रेट की असमानता दूर करने का मसौदा तैयार कर निबंधन विभाग के अधिकारियाें ने शुक्रवार को डीएम के सामने पेश किया। इसके बाद डीएम ने आसपास के जिलों से भी रिपोर्ट लेने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद मिलान किया जाएगा और फिर सर्किल रेट को अंतिम रूप देते हुए शासन को भेजा जाएगा।
शासन ने जिलों की सीमा वाले गांवों और जिले में तहसील स्तर पर सर्किल रेट की असमानता दूर करने का निर्णय लिया है। ये भी निर्देश हैं कि ऐसे गांवाें के सर्किल रेट में 10 फीसदी के आसपास ही अंतर होना चाहिए। निबंधन अधिकारियों ने सर्किल रेट का एक मसौदा तैयार कर शुक्रवार को डीएम के सामने प्रस्तुत किया। डीएम ने अधिकारियों से आसपास के सभी जिलों की रिपोर्ट मंगाने को कहा है। साथ ही तहसील स्तर पर सर्किल रेट का परीक्षण कराने को भी कहा है।
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शासन के निर्देश पर हुई जांच में दो जिलों की सीमा से सटे 144 गांव मिले हैं, जहां सर्किल रेट में 25 फीसदी से लेकर 300 फीसदी से ज्यादा तक का अंतर पाया गया है। ये गांव गोरखपुर और इससे सटे महराजगंज, संतकबीरनगर, देवरिया, कुशीनगर, मऊ और आजमगढ़ की सीमा के हैं। इसके अलावा गोरखपुर की सात तहसीलों की सीमा से सटे 274 गांव भी चिह्नित किए गए हैं, जहां सर्किल रेट में 200 फीसदी तक का अंतर है।
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कोट

सीमावर्ती गांवों के सर्किल रेट में असमानता को दूर करने के लिए निबंधन विभाग से एक ब्लू प्रिंट मिला है। अधिकारियों से कहा गया है कि वे आसपास के जिलों से भी रिपोर्ट मंगा लें ताकि मिलान कराया जा सके। इसी प्रकार तहसील की सीमा वाले गांवों का भी सर्किल रेट का निर्धारण किया जाएगा।
कृष्णा करुणेश, डीएम
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