राष्ट्रीय कुष्ठरोग दिवस
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग में हर दिन आ रहे कुष्ठ रोग के मरीज
दो साल इलाज कराने आए मरीजों के अध्ययन से मिली जानकारी, कम प्रतिरोधक क्षमता और देरी से इलाज से बढ़ जाती है बीमारी
गोरखपुर। रोगियों के संपर्क में रहने से कम प्रतिरोधक क्षमता वाले बच्चे भी कुष्ठ रोग का शिकार हो सकते हैं। बचाव और सावधानी से कुष्ठ रोग को फैलने से रोका जा सकता है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग विभाग में कुष्ठ रोग के मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का कारण शरीर की कम प्रतिरोधक क्षमता और समय पर इलाज नहीं कराना है। समय पर इलाज कराने से बीमारी को पूरी तरीके से ठीक किया जा सकता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्म रोग के विभागाध्यक्ष डाॅ. राजकुमार के निदेशन में दो वर्ष से इलाज कराने आ रहे महराजगंज, देवरिया और बिहार के 50 से अधिक गंभीर कुष्ठ रोगियों पर हुए अध्ययन से पता चला है कि देरी से इलाज कराने पर संक्रमण बढ़ सकता है। साथ ही प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने पर रोगियों के संपर्क में रहने से बैक्टीरियल इंफेक्शन के माध्यम से कम उम्र में भी कुष्ठ रोग हो रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि परिवार में यदि किसी एक सदस्य को यह बीमारी हो जाए और सावधानी न बरती जाए तो अन्य सदस्य भी संक्रमित हो सकते हैं।
एक पांच साल के एक बच्चे में कुष्ठ रोग के लक्षण मिलने पर समय पर इलाज शुरू करने के बाद उसकी स्थिति में सुधार मिला है। डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि कुष्ठ रोग उम्रदराज लोगों के साथ कम लोगों में भी मिल रहा है। पहले लोगों में जागरूकता की कमी के कारण कम ही मरीजों की स्क्रीनिंग हाे पाती थी। अब बेहतर इलाज मौजूद होने के कारण इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कम प्रतिरोधक क्षमता होने पर बीमारी के बैक्टीरिया तेजी से प्रभावित करते हैं। लंबे समय तक रोगी के करीब रहने से बच्चों में रोग के होने की संभावना ज्यादा रहती है। समय पर इलाज कराने से कुष्ठ रोग एक से छह माह में ठीक हो जाता है।
कम प्रतिरोधक क्षमता होने पर कैैसे हो सकता है कुष्ठ रोग
कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह एक से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। यह आमतौर पर रोगियों के खांसने और छींकने से हवा में मौजूद बूंदों को सांस के जरिए अंदर लेने या उनके नाक के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से फैलता है। रोगी के संपर्क में आने वाले लगभग 95 प्रतिशत व्यक्तियों में कभी भी कुष्ठ रोग नहीं होता है। यह उन लोगों को प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है।
रोग का इलाज
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कुष्ठ रोगियों का इलाज दो चरणों में किया जाता है। पहले चरण में मल्टी ड्रग थेरेपी ( एमडीटी) के माध्यम से रोगी की त्वचा पर उभरने वाले कुष्ठ रोग के शुरुआती दाग को ठीक किया जाता है। इसके बाद शरीर पर हुए घाव को ठीक किया जाता है। घाव के ऊपरी परत को हटाकर पीआरएफ (प्लेटलेट रीज फ्राइबिन) तकनीक का उपयोग किया जाता था जिससे घाव को भरने में अधिक समय लगता था। अब आईपीआरएफ (इंजेक्टेबल प्लेटलेट रिच फाइबिन) के उपयोग से सीधे दवा को शरीर में इंजेक्ट किया जा रहा है। इस तकनीक से मरीज को एक महीने के भीतर आराम मिलने लगता है। इसके साथ ही ट्रॉपिकल फैनिटोन और इंसुलिन विधि का उपयोग किया जा रहा है।