चार दिवसीय सूर्योपासना का महापर्व छठ 25 अक्तूबर को शुरु होगा। 26 अक्तूबर को खरना के बाद 27 अक्तूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य व 28 को उगते हुए सूर्य की उपासना व अर्घ्य होगा। इसको लेकर महिलाएं पूजा-अर्चना की तैयारी में अभी से लग गईं हैं।
ज्योतिर्विद पंडित जोखन पांडेय ने बताया कि छठ पर्व में व्रत, उपवास, पूजा और अर्घ्य की प्रक्रिया में पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है। 27 अक्तूबर को मुख्य पर्व है इस दिन महिलाएं निर्जल व्रत रहेंगी। छठ घाट पर शाम को पहुंच कर पूजा-अर्चना करेंगी। पानी में उतर कर डूबते सूर्य को अर्घ्य देंगी।
सूर्ययास्त शाम को 5.36 पर होगा। इसके ही तत्काल पहले सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। रात में कोशी भी भरने का कार्य होगा। वहीं अगले दिन 28 अक्तूबर को सुबह महिलाएं भोर में छठ घाट पहुंच कर पूजा-अर्चना करेंगी। सूर्योदय के इंतजार कर मंगल गीत गाएंगी। सूर्योदय 6.25 बजे होगा। इसी समय अर्घ्य दिया जाएगा, छठ व्रत का समापन होगा।
वहीं गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि नहाय खाय के दिन 25 अक्तूबर को व्रती महिलाएं पास की नदी या तालाब में स्नान करने के बाद घर पर कद्दू और चावल का ''कद्दू भात'' बनाएंगी। व्रती महिला रात में जमीन पर सोती है और सांयकाल एक समय कुछ प्रसाद ग्रहण करती है। खरना 26 अक्तूबर को होगा। इस दिन व्रती पूजा करने के बाद व्रत खोलती हैं।