गले के संक्रमण, सर्दी-जुकाम और वायरल बुखार के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी
गोरखपुर। पिछले तीन दिनों से मौसम में आए अचानक बदलाव ने डेंगू से हाल ही में स्वस्थ हुए मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। शुक्रवार को जिला अस्पताल में ऐसे कई मरीज पहुंचे, जिन्हें डेंगू से ठीक होने के बाद दोबारा बुखार और गले में संक्रमण की शिकायतें हो रही हैं। जांच में डेंगू रिपोर्ट निगेटिव आई लेकिन मौसम परिवर्तन के कारण सामान्य वायरल संक्रमण की पुष्टि हुई।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके सुमन ने बताया कि तापमान में गिरावट और हवा में नमी बढ़ने से वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं। पिछले दो दिनों से सर्दी-खांसी, फ्लू और गले के इंफेक्शन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। शुक्रवार को राप्तीनगर निवासी अतुल, जो हाल में डेंगू से स्वस्थ हुए थे, दोबारा तेज बुखार और गले के दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। जांच में पता चला कि यह सामान्य संक्रमण है।
फिजिशियन डॉ. पंकज ने बताया कि तापमान में 10 से 12 डिग्री की गिरावट की वजह से वायरल इंफेक्शन और फ्लू के मरीज बढ़ रहे हैं। ठंडी और नमी भरी हवाओं से निमोनिया, ब्रोंकाइटिस और अस्थमा के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। वहीं, खसरा, चेचक और काली खांसी जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
खजनी निवासी पुष्कर त्रिपाठी ने बताया कि उनके रिश्तेदार को डेंगू से ठीक होने के बाद दोबारा बुखार और गले में दर्द की समस्या हो गई। जांच में पता चला कि यह मौसम के कारण सामान्य संक्रमण है। रूस्तमपुर के अमित शर्मा ने बताया कि शरीर में दर्द और हल्का बुखार था। डॉक्टर ने बताया कि मौसम बदलने से ऐसी दिक्कतें बढ़ी हैं।
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बाल रोग संस्थान में निमोनिया के आए 15 मामले
बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज की शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि बच्चों में निमोनिया के 15 नए केस सामने आए हैं, जो पिछले हफ्ते से अधिक हैं। छह बच्चे ठीक होकर घर जा चुके हैं, जबकि नौ अभी भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों को ठंड से बचाने और उन्हें मां का दूध पिलाने पर जोर दिया जाना चाहिए। एम्स के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अजय मिश्र के अनुसार, ठंडी हवा में नाक और गले की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिससे इम्युनिटी कमजोर होती है। ऐसे में वायरस को हमला करने का मौका मिल जाता है।
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कोट
मौसम में अचानक बदलाव बच्चों की सेहत पर विशेष रूप से असर डालता है। ठंडी-गर्मी और नमी की वजह से बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है। नतीजतन, उनमें सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, गले का इंफेक्शन, वायरल फ्लू और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल इंफेक्शन (उल्टी-दस्त) जैसी समस्याएं अधिक देखी जा रही हैं। तापमान में गिरावट से शरीर का संतुलन बिगड़ता है, जिससे बच्चाें सर्दी-जुकाम व निमोनिया के मामले बढ़ते हैं। तीन साल से कम उम्र के बच्चों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
- डॉ. तान्या चतुर्वेदी, कंसलटेंट- पीडियाट्रिक्स
सावधानियां:
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छरदानी और रिपेलेंट का प्रयोग करें।
उबला या फिल्टर किया पानी पिएं।
गीले कपड़े बदलें और त्वचा को सूखा रखें।
तेज बुखार या उल्टी-दस्त की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।