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Gorakhpur News: नजरिया बदलने के लिए सामाजिक संरचना में परिवर्तन जरूरी

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डीडीयू के एमएमटीटीसी में 14 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम का शुभारंभ
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गोरखपुर। इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष और प्रख्यात समाजशास्त्री प्रो. मैत्रेयी चौधरी ने कहा कि जेंडर के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने के लिए समाजशास्त्र की मूलभूत समझ सभी के लिए आवश्यक है। इसके लिए सोच और नजरिया बदलने के लिए सामाजिक संरचना में परिवर्तन लाना होगा।
वह दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर (एमएमटीटीसी) और समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 14 दिवसीय पुनश्चर्या पाठ्यक्रम के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं।
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उन्होंने कहा कि लैंगिक असंवेदनशीलता एक सामाजिक रूप से निर्मित समस्या है। हमारा समाजीकरण जिस प्रकार होता है, हमारा व्यवहार और दृष्टिकोण उसी से निर्मित होता है। सामाजिक वास्तविकता कैसे निर्मित होती है, यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने कहा कि शिक्षा संस्थानों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में संवेदनशीलता, सहानुभूति और साझेदारी की भावना विकसित करें। एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. चंद्रशेखर ने स्वागत किया। समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग द्विवेदी ने रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि हमें अपनी भाषा, प्रतीक और संवाद के स्तर पर जेंडर-संवेदी दृष्टिकोण विकसित करना होगा। संचालन डॉ. मनीष पांडेय ने किया। कार्यक्रम में प्रो. संगीता पांडेय, प्रो. सुभी धुसिया, प्रो. अंजू, डॉ. पवन कुमार, डॉ. प्रकाश प्रियदर्शी व डॉ. दीपेंद्र मोहन सिंह आदि मौजूद रहे।
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