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Gorakhpur News: सीबीआई ने ठेकेदार से कराई अफसर को कॉल...धौंस जमाई तो फंस गया

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गोरखपुर। थावे-छपरा के बीच रेल लाइन मेंटेनेंस के काम में ठेकेदार से दो लाख रुपये मांगने वाले सीनियर डीईएन-टू सत्यम कुमार सिंह को पकड़ने के लिए सीबीआई लखनऊ ने दस दिनों से जाल फैला रखा था। टीम ने आरोपों से जुड़े सबूत जुटाए और इसके बाद ठेकेदार की मोबाइल फोन पर अधिकारी से बात करवाई। करीब 35 मिनट की बातचीत में सत्यम सिंह खुद फंस गया। सूत्रों की मानें तो बातचीत में उन्होंने ठेकेदार से मनचाहे फर्म से खरीदारी कराने के लिए धौंस जमा रहा था और दो लाख रुपये की घूस भी मांग ली, जिसे रिकॉर्ड कर लिया गया। इसके बाद सीबीआई ने रंगे हाथों पकड़ भी लिया।
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डीआरएम कार्यालय लहरतारा, वाराणसी में तैनात सीनियर डीईएन-टू सत्यम कुमार सिंह को सीबीआई लखनऊ की टीम ने बुधवार को गिरफ्तार किया था। रेल प्रशासन ने निलंबित भी कर दिया। जानकारी के मुताबिक, राजपुताना शक्ति इंटरनेशनल फर्म के प्रोपराइटर महेंद्र सिंह ने थावे-छपरा रेल लाइन के मेंटेनेंस के लिए टेंडर डाला था और उन्हें चार करोड़ रुपये का ठेका मिल गया, लेकिन इस काम को सीनियर डीईएन-टू अपने जानने वाली फर्म को दिलवाना चाहता था। टेंडर को लेकर अधिकारी और ठेकेदार में अनबन बढ़ती गई।



सूत्रों के मुताबिक, ठेकेदार ने सीबीआई से की गई शिकायत में लिखा है कि उन्हें टेंडर मिलने के बाद नियम विरुद्ध जाकर एग्रीमेंट कराया गया। दो महीने काम कराने के बाद भी भुगतान अटका दिया गया। आरोप है कि लाइन पर काम कराने के लिए दो सेट लाइट जेनरेटर खरीदना था, लेकिन अधिकारी द्वारा आक्सा कंपनी का जेनरेटर खरीदने का दबाव बनाया गया। जबकि एग्रीमेंट में कंपनी का नाम नहीं लिखा था। प्रति जेनरेटर उनका एक लाख का कमीशन तय था।
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इसके अलावा गाजीपुर में रिश्तेदार को ठेका दिलाने व अपनी गाड़ी को किराए पर लगवाने का भी आरोप लगा है। करीब एक महीने पहले शिकायत पर सीबीआई ने दस दिनों से पड़ताल की और कुछ सबूत एकत्र किए। इसके बाद अधिकारी को मोबाइल पर बात कराकर रिकॉर्ड करा लिया।



एनईआर में थी तीसरी तैनाती



डीआरएम कार्यालय लहरतारा, वाराणसी में तैनात सीनियर डीईएन-टू सत्यम कुमार सिंह की पूर्वोत्तर रेलवे में तीसरी जगह तैनाती है। वर्ष 2009 बैच के सत्यम सिंह की पहली तैनाती पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के सिवान में हुई थी। यहां से वर्ष 2012 में वह गोरखपुर मुख्यालय में अधिशासी अभियंता (टीएम) पद पर दो साल रहे। इसके बाद रेल विकास निगम लिमिटेड में तबादला हो गया। फिर वाराणसी मंडल में सीनियर डीईएन-टू पर तैनात हुए और थावे-छपरा प्रोजेक्ट देख रहे थे।
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