गोरखपुर। रिश्वत के मामले में सीबीआई की पकड़ में आया डीआरएम वाराणसी कार्यालय में तैनात सीनियर डीईएन टू सत्यम कुमार सिंह जहां भी तैनात रहा, अपनी करतूतों से विवादों और जांच के घेरे में रहा। 2014-15 के दौरान गोरखपुर में तैनाती के दौरान विजिलेंस की जांच में सत्यम का नाम सामने आया था। इस मामले में भी सत्यम को विजिलेंस की तरफ से चार्जशीट दी गई थी। इसके पहले 2009 में बिहार के सीवान में एईएन पद पर तैनाती के दौरान भी विजिलेंस ने उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बताया जा रहा है कि गोरखपुर के ठेकेदार तैनाती के समय से ही सत्यम के साथ संपर्क में थे।
सूत्रों की मानें तो गोरखपुर में तैनाती के समय यहां के एक ठेकेदार के काफी करीबी संपर्क में सत्यम आ गया था। वह दूसरी फर्म के नाम से खुद रेलवे ट्रैक के मेंटेनेंस के काम को लेता था। इसकी शिकायत भी विजिलेंस में की गई थी।
बार-बार की डिमांड से आजिज ठेकेदार ने कर दी शिकायत
बताया जा रहा है कि सत्यम ठेकेदार महेंद्र सिंह पर बार-बार घूस और कमीशन का दबाव बनाता था। तंग आकर ठेकेदार ने सीबीआई के लखनऊ कार्यालय में शिकायत की। सीबीआई सूत्रों की मानें तो बनारस मंडल से इस तरह की शिकायतें संज्ञान में आ रही थीं, लेकिन शिकायतकर्ता नहीं मिल रहा था। इसलिए कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। महेंद्र सिंह ने जब शिकायत की, तो सीबीआई ने तैयारी कर ली। मंगलवार दोपहर सत्यम ने ठेकेदार को दो लाख रुपये घूस के साथ बनारस रेलवे मुख्यालय पर सुबह 11 बजे बुलाया। सीबीआई की टीम ने महेंद्र सिंह के पास रखे दो लाख रुपयों में सीबीआई ने केमिकल लगा दिए। साथ ही ठेकेदार के शर्ट के ऊपरी जेब में माइक्रो चिप डिवाइस (रिकार्डिंग) डालकर दफ्तर भेजा। सीबीआई की टीम ने दो घंटे पहले ही दफ्तर पहुंचकर घेराबंदी कर ली थी। इसी बीच दोपहर लगभग दो बजे ठेकेदार, सत्यम के कार्यालय में गया। 35 मिनट तक ठेकेदार और सत्यम के बीच बातचीत हुई। फिर ठेकेदार लिफाफा वहीं छोड़कर दफ्तर से बाहर निकल गया। उनके बाहर निकलते ही एक और ठेकेदार दफ्तर पहुंचा। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि टीम जब दफ्तर पहुंची तो सत्यम लिफाफे से नोट निकालकर गिन रहा होता है। इसके बाद सीबीआई ने सत्यम को हिरात में ले लिया।
टेबल पर कुछ और रुपये भी मिले
सूत्रों ने बताया कि दफ्तर के अंदर जयपुर का भी एक ठेकेदार था। सत्यम के सेक्शन में ही बलिया के पास इस ठेकेदार का काम चलता है। इस ठेकेदार के साथ ही बैठकर सत्यम चाय-नाश्ता करते हुए नोट गिन रहा था। सूत्रों ने बताया कि ये ठेकेदार भी करीब ढाई लाख रुपये लेकर आया था। कुल मिलाकर सीबीआई ने शिकायत वाले दो लाख और मौके पर मिले ढ़ाई लाख रुपये को जब्त कर लिया। सीबीआई अब इस नेटवर्क की भी तलाश कर रही है।
माफिया वाला हिस्सा अब अधिकारी वसूल रहे
सीबीआई सूत्रों की मानें तो इस समय रेलवे के ठेकों और स्क्रैप में माफिया की वसूली पूरी तरह खत्म हो चुकी है। जौनपुर, गाजीपुर, बलिया और बनारस में इन कामों के बदले अब माफिया के पास रुपये नहीं जाते। अब कुछ अफसर ही माफिया वाला हिस्सा वसूल रहे हैं। सत्यम ने अपने सेक्शन में काम करने वाले ठेकेदारों के साथ साझेदारी कर ली थी।
भ्रष्टाचार के दूसरे मामले में तेज हुई जांच
एनईआर में भ्रष्टाचार के एक दूसरे मामले में भी सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। मेटेरियल मैनेजर वीर बहादुर सिंह और तीन अन्य नामजद आरोपी हैं। दिल्ली सीबीआई की नोटिस पर तीन अधिकारी बयान दर्ज कराने दिल्ली गए हैं। आरोप है कि वीर बहादुर सिंह के केस में बिचौलिए विनय कुमार श्रीवास्तव के मोबाइल फोन की रिकॉर्डिंग में इन अधिकारियों संग बातचीत मिली है। इसी बातचीत के आधार पर सीबीआई ने तीनों को दिल्ली में पेशी के लिए बुलाया है। सूत्रों की मानें तो मंगलवार को गोरखपुर से निकले तीनों अधिकारियों ने बुधवार को अपना बयान दर्ज कराया है। इसमें दो ओएस और डिपो का एक बड़ा अधिकारी है।
खुद को एक नेता का रिश्तेदार बता गांठता था रौब
सत्यम कुमार सिंह अपने आप को प्रदेश की एक नेता का रिश्तेदार बता रौब गांठता था। विभागीय कर्मचारी हो या ठेकेदारी करने वाले लोगों से इसी नाम पर शासन में अपनी पैठ बताकर दबाव बनाता था। गिरफ्तारी के वक्त सीबीआई ने इस रिश्ते की पड़ताल की तो ये भी हवा-हवाई निकला। हालांकि, सीबीआई उसके नेटवर्क की तलाश कर रही है। सीबीआई खुद हैरत में है कि दो बार विजिलेंस की चार्जशीट के बाद भी लाभ वाले पद पर वह कैसे बना रहा।
देवरिया में ठेकेदार के परिसर पर सीबीआई ने मारा छापा, ले गई रिकार्ड
सीबीआई लखनऊ की टीम ने बनारस से जुड़े केस में देवरिया में भी छापा मारा। गिरफ्तार सत्यम के फोन में व्हाट्सएप चैटिंग के साथ फोन रिकॉर्डिंग मिली है। इसी आधार पर सीबीआई की टीम ने देवरिया के ठेकेदार के परिसर पर छापा मारा। सुबह आई टीम शाम 4 बजे करीब लौट गई। सूत्रों की मानें तो सीबीआई को ठेकेदार के साथ फर्मों में लेन-देन का लंबा रिकॉर्ड मिला है। ठेकेदार के साथ सत्यम अपनी फर्मों को भी संचालित करता था। रिकॉर्ड मिलान और बैंक के स्टेटमेंट समेत अन्य जरूरी प्रपत्रों के आधार पर सीबीआई आगे भी कार्रवाई कर सकती है।