गोरखपुर। करीब 10 साल से ठप पड़ी पनियहवा-छितौनी-तमकुहीरोड रेल लाइन के लिए इस बार फिर बजट मिल गया है। हालांकि, केवल 10 करोड़ रुपये ही जारी हुए हैं, लेकिन इतने भर से ही इस रेल लाइन के निर्माण में तेजी आने की उम्मीद है। यह लाइन गंडक यूपी-बिहार की करीब तीन लाख आबादी को सुगम आवागमन के साथ-साथ हर साल बाढ़ से भी बचाएगी। इसके अलावा आनंदनगर-घुघली, खलीलाबाद-बहराइच और सहजनवा-दोहरीघाट को भी बजट में धन उपलब्ध कराया गया है।
गंडक नदी के किनारे बसे कुशीनगर जिले के खड्डा, पडरौना और तमकुहीराज तहसील के अलावा पड़ोसी प्रांत बिहार के पश्चिमी चंपारण और गोपालगंज जिले की बड़ी आबादी हर साल बाढ़ से प्रभावित होती है। इस क्षेत्र में पहले आवागमन के साधन ही नहीं थे। इसे देखते हुए वर्ष 2006 में गोरखपुर-नरकटियागंज रेलखंड के पनियहवा रेलवे स्टेशन से छितौनी होते हुए कुशीनगर के ही थावे-कप्तानगंज रेलमार्ग के तमकुहीरोड स्टेशन तक रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था।
वर्ष 2012 में पनियहवा से छितौनी तक रेल लाइन बिछाने के बाद आगे का काम रुक गया। छितौनी से तमकुहीरोड के बीच करीब 58 किलोमीटर हिस्से पर अभी कहीं-कहीं मिट्टी भराई का भी काम नहीं हुआ है। इस बार के बजट में केंद्र सरकार ने इस रेल लाइन के लिए 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इससे बंद पड़ा काम फिर शुरू हो जाएगा।
घुघली-आनंदनगर लाइन के काम में भी आएगी तेजी
पूर्वोत्तर रेलवे की नई प्रस्तावित लाइन सहजनवां-दोहरीघाट (81.17 किमी.) के लिए भी 200 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इसके अलावा आनंदनगर-घुघली वाया महाराजगंज (50 किमी.) के लिए 450 करोड़ रुपये मिले हैं। ये दोनों ही लाइनें गोरखपुर स्टेशन के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार करेंगी। आनंदनगर-घुघली लाइन के बन जाने से बिहार जाने वाली ट्रेनों को बढ़नी-आनंदनगर के रास्ते चलाया जा सकेगा। वहीं बहराइच-खलीलाबाद वाया भिनगा-श्रावस्ती-बलरामपुर-उतरौला-डुमरियागंज-मेहदावल-बांसी (240.26 किमी.) के लिए भी 450 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। इस रेल लाइन के निर्माण से नेपाल बाॅर्डर के इलाके सीधे गोरखपुर से जुड़ेंगे।
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