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UP: पड़ोसी ने ही रची थी अशोक के अपहरण की साजिश, व्यापार में हुआ था घाटा-ऐसे सुलझी किडनैपिंग की पूरी गुत्थी

Mon, 25 Aug 2025 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पड़ोसी ने व्यापार में घाटा होने पर अपने मित्र के जरिये अशोक जायसवाल के अपहरण की साजिश रची। इसके बाद एक अन्य साथी की मदद से करुणेश दुबे और कमालुद्दीन से संपर्क साधा था। रिमांड पर लिए गए कमालुद्दीन ने पूछताछ में बताया है कि अशोक जायसवाल के पड़ोस में रहने वाले प्रदीप सोनी ने कारोबार के नाम पर उनसे पांच लाख रुपये उधार लिए थे।
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घटना का खुलासा करते एसएसपी और एसपी सिटी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल के अपहरण की साजिश उनके ही पड़ोसी ने व्यापार में हुए घाटा को पूरा करने के लिए रची थी। मुख्य आरोपी कमालुद्दीन को रिमांड पर लेकर पूछताछ में पुलिस को यह जानकारी मिली है। पुलिस पड़ोसी प्रदीप सोनी समेत तीन को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
 
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घर पहुंचे डॉक्टर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पड़ोसी ने व्यापार में घाटा होने पर अपने मित्र के जरिये अशोक जायसवाल के अपहरण की साजिश रची। इसके बाद एक अन्य साथी की मदद से करुणेश दुबे और कमालुद्दीन से संपर्क साधा था। रिमांड पर लिए गए कमालुद्दीन ने पूछताछ में बताया है कि अशोक जायसवाल के पड़ोस में रहने वाले प्रदीप सोनी ने कारोबार के नाम पर उनसे पांच लाख रुपये उधार लिए थे।
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एसएसपी का आभार जताते दंपति - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साथ ही प्रदीप सोनी ने अशोक के हॉस्पिटल में ही एक ज्वेलरी की दुकान खोली थी। यह दुकान घाटे में चली गई थी। कमालुद्दीन ने पुलिस को बताया कि अशोक को रुपये न देने पड़े इसलिए प्रदीप सोनी ने खोराबार के बुद्ध विहार तारामंडल निवासी तरुण त्रिपाठी संग मिलकर अशोक के अपहरण की साजिश रची।

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पुलिस का अभिवादन करते पहुंचे दंपति - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिर तरुण ने ट्रांसपोर्टनगर निवासी गैंगस्टर मोनू त्रिपाठी से यह बात बताई। मोनू ने करुणेश दुबे और कमालुद्दीन को भी साजिश में शामिल कर लिया। इसके बाद साजिश के तहत बीते 25 जुलाई को रेलवे स्टेडियम जाते समय कौआबाग अंडरपास अशोक जायसवाल को अगवा कर लिया गया था। कमालुद्दीन ने बताया कि उन्हें यह भरोसा था कि अशोक जायसवाल को थोड़ा बहुत धमकाने के बाद ही रुपये मिल जाएंगे।
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भावुक पल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस सोमवार को मामले का पर्दाफाश कर सकती है। हिरासत में लिया गया मोनू गोला थाने का गैंगस्टर है। उसके खिलाफ लूट व हत्या की कोशिश के सात आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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ये अस्पताल भी परिवारक का है - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अशोक के अपहरण की वजह अब आई सामने
रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल के अपहरण के मामले में पुलिस को आरोपियों से कनेक्शन नहीं मिल पा रहा था। इसकी वजह यह थी कि सारे आरोपी सिकरीगंज और बेलघाट इलाके के रहने वाले हैं और उन्होंने पादरी बाजार इलाके से अशोक जायसवाल को निशाना बनाया था।
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भावुक पल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उनका किसी तरह से इनका जुड़ाव नहीं हो पा रहा था। गिरफ्तार हुए आरोपियों ने बताया था कि कमालुद्दीन ही इस मामले में सब कुछ जानता है। वे लोग कमालुद्दीन के इशारे पर काम कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी कमालुद्दीन को रिमांड पर लिया और पूछताछ में असली वजह सामने आई।

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भावुक पल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रदीप के पास था अशोक के घर और अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस
कमालुद्दीन ने पूछताछ में बताया कि अशोक के घर एवं हॉस्पिटल के सीसीटीवी कैमरे का एक्सेस प्रदीप के पास भी था क्योंकि अशोक ने प्रदीप का ड्राइवर अपने यहां लगा लिया था। अशोक ने डीवीआर और कैमरे का पासवर्ड नहीं बदले थे। 

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अस्पताल परिसर भी खाली रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वारदात के दिन भी हिरासत में लिए गए मोनू और तरुण ने प्रदीप को वीडियो कॉल करके अशोक की लोकेशन ट्रेस कर ली कि वह कितने बजे घर से निकले थे। इसके बाद बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था। कमालुद्दीन ने बताया कि वारदात के पहले उन्होंने सात दिन तक कैमरे की मॉनीटरिंग की थी।

यह है मामला
शाहपुर इलाके के पादरी बाजार में रिटायर्ड एयरफोर्स कर्मी अशोक जायसवाल का रेलवे स्टेडियम जाते समय कौआबाग अंडरपास से कार सवार बदमाशों ने 25 जुलाई को अपहरण कर लिया था। सुबह दस बजे जब एक अनजान मोबाइल से उनकी पत्नी डाॅ. सुषमा जायसवाल के मोबाइल पर फिरौती की कॉल आई तब अपहरण की घटना सामने आई। 

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घर पहुंचने के बाद भावुक हुए डॉक्टर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अशोक जायसवाल के साढ़ू ने पुलिस को सूचना देकर बताया कि एक करोड़ रुपये की फिरौती मांगी जा रही है। पुलिस ने सूचना के करीब 15 घंटे बाद अशोक जायसवाल को सकुशल बरामद कर तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया।

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खुशी के आंसू - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूछताछ में पता चला कि अपहरण में सात बदमाश शामिल थे, दो गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था। इसी के बाद कमालुद्दीन सहित अन्य आरोपियों का नाम सामने आया था। कमालुद्दीन की गिरफ्तारी के लिए उस पर 50 हजार रुपये का इनाम रखा गया था लेकिन अपनी साठगांठ से उसने इनाम घोषित होने के अगले दिन ही रायबरेली कोर्ट में दर्ज एक केस में चल रहे एनबीडब्ल्यू में वह सरेंडर हो गया था।
 
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अस्पताल परिसर भी खाली रहा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस ने रिमांड पर लेकर पूछताछ करने के लिए अर्जी दी थी जिसके तहत 28 घंटे की कोर्ट से अनुमति मिली है। कोर्ट के आदेश के साथ शाहपुर थाने की टीम शनिवार सुबह दस बजे रायबरेली जेल पहुंची और वहां से कमालुद्दीन को लेकर गोरखपुर आई। पूरी रात पूछताछ करने के बाद उसे रविवार को रायबरेली जेल में दाखिल कर दिया।
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