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Gorakhpur News: पुरवा का साथ मिलते ही छाते हैं काले बादल..हथिया के पेट से निकलता है जाड़ा

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गोरखपुर। हथिया नक्षत्र में अगर पुरवा हवा चलने लगे तो आसमान में काले बादल छाते हैं और झमाझम बारिश होती है। विदाई की बेला में मानसून सक्रिय हो उठता है। यह मौसम किसान और गृहस्थ के लिए बहुत ही बेहतर माना गया है, क्योंकि धान की फसल के लिए यह अमृत जैसा है। इस संबंध में कवि घाघ की कहावत ''''आवत आदर न दियो जावत दियो न हस्त कहे घाघ दोनों गए पाहुन व गृहस्थ'''' बहुत प्रचलित है। यही नहीं, कहा जाता है कि हथिया के पेट से ही जाड़ा निकलता है। यानी जो बारिश होती है, इसी के बाद सर्द ऋतु की शुरुआत होती है।
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हनुमान मंदिर बेतियाहाता के महंत आचार्य राम नारायन त्रिपाठी कहते हैं- हथिया नक्षत्र में होने वाली बारिश का खास महत्व होता है। कहा जाता है कि इस बारिश के बाद से मौसम में अचानक परिवर्तन शुरू होने लगता है और हल्के जाड़े की शुरुआत हो जाती है, इसी के साथ ही गरमी की विदाई भी हो जाती है। यह बारिश आगामी रबी की फसलों के लिए बहुत लाभदायक साबित होगी, क्योंकि खेत में इतनी नमी हो जाती है कि गेहूं की बुवाई के समय सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। आचार्य त्रिपाठी कहते हैं- 27 में से नौ नक्षत्रों को बारिश का नक्षत्र माना जाता है। इसमें हस्त यानी हथिया भी शामिल है। इसे बारिश को गरमी का अंत और जाड़े की शुरुआत के रूप में देखा जाता है।
हथिया में अच्छी बारिश तो ठंड भी पड़ेगी
अश्विन माह के अंतिम सप्ताह में पड़ने वाला नक्षत्र हथिया है। इस नक्षत्र में होने वाली बारिश फसलों के लिए अच्छा माना जाता है। करीब एक दशक बाद हथिया नक्षत्र का मूल स्वरूप देखने को मिला है। आसमान में काले बादल, गरज के साथ मूसलाधार बारिश हो रही है। हाल के दिनों में हल्की बारिश में ही यह अवधि समाप्त हो जाती रही है। हथिया नक्षत्र में बारिश की अवधि अधिकतम 10 दिन तक होती है। लगातार हो रही अच्छी बारिश से इस साल ठंड भी अच्छी पड़ेगी।
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प्रो. सीपीएम त्रिपाठी, सेवानिवृत्त आचार्य डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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