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अर्पित हॉस्पिटल प्रकरण : डॉक्टर साकिब सलीम को मिली जमानत

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मरीज माफियाः डॉ. साकिब के नाम पर ही हॉस्पिटल का हुआ था रजिस्ट्रेशन, झूठा शपथपत्र देने के मामले में हुआ था केस
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गोरखपुर। अर्पित हॉस्पिटल प्रकरण में डॉ. साकिब सलीम को जमानत मिल गई है। 24 फरवरी को उन्हें गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवाया था। राजघाट के हांसूपुर निवासी डॉ. साकिब सलीम के नाम से हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन था लेकिन वह बिहार में प्रैक्टिस कर रहे थे। झूठा शपथपत्र देने की वजह से उनके खिलाफ कार्रवाई हुई थी। डाॅ. साकिब सलीम को जमानत मिलने के बाद अन्य आरोपियों ने भी प्रक्रिया शुरू कर दी है।



मरीज माफिया के नेटवर्क देवरिया और बाकी जिलों से लेकर गोरखपुर तक के अस्पतालों में फैला हुआ है। चिलुआताल इलाके में संचालित अर्पित हॉस्पिटल पर देवरिया के बच्चे को मरीज के रूप में बेचने का आरोप है। देवरिया से मेडिकल काॅलेज में इलाज के लिए ले लाए गए बच्चे को बिचौलियों के माध्यम से अर्पित हॉस्पिटल पहुंचा दिया गया था। इलाज में सुधार नहीं होने और वहां से डिस्चार्ज कराने पर मोटी रकम की डिमांड करने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। तब पता चला कि यह हाॅस्पिटल भी मोटे कमीशन पर बिचौलियों के जरिये मरीज खरीदता है।
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केस दर्ज कर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और 108 नंबर एंबुलेंस के चालक, ईएमटी के साथ बिचौलियों को गिरफ्तार किया। जांच के क्रम में पुलिस हॉस्पिटल के मैनेजर तक पहुंची और वहां से संचालक भी शिकंजे में आ गया। इस सब के बीच में पता चला कि संचालक डाॅ. प्रवीण के पास विदेश से एमबीबीएस की डिग्री है, लेकिन भारत में प्रैक्टिस के लिए ली जाने वाली परीक्षा पास नहीं कर पाया है।



लिहाजा उसने एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉ. साकिब सलीम से संपर्क किया। उनकी डिग्री लगाकर अर्पित हॉस्पिटल का पंजीकरण कराया। यह भी सामने आया कि रजिस्ट्रेशन के बाद भी डॉ. साकिब सलीम बिहार में ही प्रैक्टिस करते हैं, अर्पित हॉस्पिटल पर तो वह आते ही नहीं हैं। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट सीएमओ को दी। सीएमओ की टीम ने जांच की और उसके बाद पुलिस ने डॉ. साकिब को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।



अप्रशिक्षित व्यक्ति कर रहे थे इलाज, रजिस्टर्ड डॉक्टर थे लापता



एडिशनल मुख्य चिकित्सा अधिकारी की तहरीर पर गुलरिहा पुलिस ने डॉ. साकिब सलीम और डॉ. प्रवीण सिंह पर केस दर्ज किया है। अर्पित हॉस्पिटल में पूर्णकालिक चिकित्सक के रूप में डाॅ. साकिब सलीम ने सेवा देने के लिए शपथपत्र दिया था। 18 फरवरी 2025 को डाॅ. अनिल कुमार सिंह, नोडल अधिकारी नर्सिंग होम पंजीकरण की टीम ने निरीक्षण किया तो पंजीकृत चिकित्सक और संचालक उपस्थित नहीं मिले, मौके पर दो से तीन स्टाफ थे। अप्रशिक्षित व्यक्ति इलाज कर रहे थे।
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वर्जन



डॉ. साकिब सलीम की डिग्री पर ही हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन था। स्वास्थ्य टीम की जांच में पता चला कि वह हॉस्पिटल में पूर्णकालिक सेवाएं देने की जगह कहीं और प्रैक्टिस कर रहे थे। डाॅ. साकिब सलीम और प्रवीण सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है। साकिब सलीम को जमानत मिल गई है।



- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी
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