करीमनगर में पकड़ा गया मुरादाबाद से मंगाया गया रैपर, मिठाई की बड़ी दुकानों पर होना था इस्तेमाल
गोरखपुर। चमकीली पन्नी में लिपटी काजू बर्फी और मिल्क केक खानों वाले संभलकर रहें। जिसे मिठाई पर लगी चांदी समझ रहे हैं, असल में वह एल्युमीनियम की परत (वर्क) हो सकती है। शहर के करीमनगर इलाके में सोमवार को एक घर में छिपाकर रखा करीब ढाई क्विंटल एल्युमीनियम वर्क का रैपर पकड़ा गया है। इसे शहर की बड़ी दुकानों पर भेजा जाना था। छापा मारने गई खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को आशंका है कि शहर में अभी इस तरह के चार से पांच और धंधेबाज हो सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एल्युमीनियम वर्क सेहत के लिए हानिकारक है। इसे खाकर फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। यदि आप लंबे समय से ऐसी मिठाई खा रहे हैं तो लिवर और किडनी खराब होनी तय है। कैंसर का भी खतरा है।
छोटी-बड़ी दुकानों में मिठाई पर चांदी का वर्क लगाया जाता है। काजू बर्फी और मिल्क केक जैसी सूखी मिठाइयों पर इसकी एक लेयर ही रहती है। वहीं लालमोहन, कदमखीर समेत कुछ मिठाइयों पर इसका स्टीकर होता है। दुकानदार इसे मिठाई की खूबसूरती बढ़ाने के लिए लगाते हैं। अब धंधेबाजों ने यहां भी जुगाड़ खोज लिया है।
दरअसल, असली चांदी करीब 97 हजार रुपये प्रति किलोग्राम है। इससे बने पेपर की कीमत भी एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम के ही आसपास आएगी। इतना महंगा पेपर वर्क इस्तेमाल करने पर मिठाई का दाम भी बढ़ जाएगा। लिहाजा धंधेबाजों ने इसकी जगह एल्युमीनियम वर्क मंगाना शुरू कर दिया।
गोरखपुर के एक व्यापारी ने मुरादाबाद से माल मंगाया था। इसे करीमनगर में पैकेट में रखा जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने सोमवार शाम छापा मारकर माल बरामद किया। इस कार्रवाई में मुख्य खाद्य निरीक्षक हितेंद्र मोहन त्रिपाठी समेत खाद्य विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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पेट के लिए खतरनाक है एल्युमीनियम
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के प्रवक्ता डॉ. राजकिशोर बताते हैं कि एल्युमीनियम खाने से पेट में दर्द, उल्टी-दस्त आदि बीमारियां हो सकती हैं। अवसाद, चिंता और स्मृति दोष जैसी मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं। इसके अलावा हड्डियां भी कमजोर हो रही हैं। एल्मुमीनियम वर्क लगी मिठाई के सेवन से किडनी और लिवर की समस्या के अलावा कैंसर भी हो सकता है।
बिछिया की डेयरी में पकड़ा गया 10 क्विंटल खोवा, डेढ़ क्विंटल नष्ट
दूध व पनीर का भी लिया गया नमूना, केमिकल से 10 दिन तक सुरक्षित रखते हैं पनीर
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मिलावटखोरों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत सोमवार को बिछिया में गोड़धोइया नाले के पास डेयरी पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारा। होली के लिए अभी से 10 क्विंटल खोवा तैयार किया गया था। इसके अलावा पाउडर से बना दूध व पनीर भी था। करीब डेढ़ क्विंटल खोवा पर फफूंद लग गए थे। इनसे दुर्गंध उठ रही थी। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसे नष्ट कराया। शेष खोवा जब्त कर लिया। दूध व पनीर के भी नमूने लिए गए।
खाद्य सुरक्षा विभाग को खबर लगी थी कि इस डेयरी में केवल पाउडर के इस्तेमाल से दूध, पनीर, खोवा के अलावा पेड़ा, बर्फी, गुलाब जामुन आदि मिठाइयां भी बनती हैं। सोमवार दोपहर बाद जब टीम पहुंची तो एक कमरे में करीब 10 क्विंटल खोवा रखा था। इनमें से डेढ़ क्विंटल खोवा से दुर्गंध आने लगी थी।
डेयरी संचालक ने बताया कि होली के लिए डिमांड अधिक है, इसलिए पहले से ही माल तैयार कर रहे थे। खोवा व पनीर को सुरक्षित रखने के लिए एक खास प्रकार के केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इससे खोवा 10 से 12 दिन तक ताजा दिखता है। खराब डेढ़ क्विंटल खोवा को नष्ट करा दिया गया। यहां से खोवा के अलावा दूध व पनीर का भी नमूना लिया गया।
मिलावट पर सरकार सख्त, होली पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश
तीन टीमें गठित कर खाद्य सामग्रियों की होगी जांच
मिलावट पर रोक लगाने के लिए व्यापारियों के साथ हुई बैठक
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे मिलावटखोरों पर सरकार ने भी सख्ती शुरू कर दी है। होली के मद्देनजर सभी जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। इस क्रम में खाद्य सुरक्षा विभाग ने तीन टीमें गठित कर दी हैं। ये टीमें मंडी में मिठाई व अन्य खाद्य सामग्री की जांच करेंगी और नमूने एकत्रित कर कार्रवाई भी कराएंगी। इसके अलावा दुकानदारों को भी इस बात के लिए जागरूक किया जाएगा कि वे मिलावटी खाद्य सामग्री की बिक्री न करें।
सोमवार को खोवा मंडी में व्यापारियों की बैठक आयोजित हुई। इसमें खोवा व पनीर में सबसे अधिक मिलावट की शिकायत होने की बात कहते हुए सुधार की अपील की गई। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह और मुख्य खाद्य निरीक्षक हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने व्यापारियों से अपील की कि खोवा और पनीर की शुद्धता को लेकर सतर्कता बरतें। खोवा मंडी के व्यापारियों को खाद्य सुरक्षा नियमों की भी जानकारी दी गई। इस दौरान करीब 30 व्यापारी मौजूद रहे।
पचपेड़वा का खोवा, खजनी का पनीर भी मिलावटी
व्यापारियों ने मीटिंग के दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग के अफसरों को बताया कि गोरखपुर में सबसे अधिक खोवा कानपुर से आता है। इसमें मिलावट की आशंका भी सर्वाधिक होती है। जबकि, सबसे शुद्ध खोवा पचपेड़वा (सिद्धार्थनगर) से आता है। इसी प्रकार गाजीपुर और खजनी से सबसे अधिक पनीर आता है। व्यापारियों ने खोवा का नमूना भी दिया। अफसरों ने सामान्य पहचान के आधार पर बताया कि पचपेड़वा का शुद्ध बताया जा रहा खोवा भी कानपुर जैसा ही मिलावटी है। वहीं खजनी का पनीर खराब है। गाजीपुर के पनीर की क्वालिटी थोड़ी बेहतर मिली।
वर्जन
शहर के करीमनगर इलाके में एक घर से करीब ढाई क्विंटल एल्युमीनियम वर्क पकड़ा गया। यह चांदी वर्क बताया जा रहा था। माल को जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा बिछिया में करीब 10 क्विंटल खोवा मिला। इनमें से डेढ़ क्विंटल खोवा से दुर्गंध आ रही थी। उसे मौके पर ही नष्ट कराया गया। पनीर व खोवा को ताजा बनाए रखने के लिए केमिकल के प्रयोग की जानकारी मिली। नमूने जांच के लिए भेजे जाएंगे।
- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य