गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में एमबीबीएस छात्रा से छेड़खानी की घटना के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था की शनिवार को समीक्षा की गई। डिप्टी डायरेक्टर अरुण कुमार सिंह ने परिसर में छात्राओं के अलावा महिला मरीजों व डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सुनसान इलाके में महिला गार्डों की टोली (समूह) की ड्यूटी लगाने का निर्देश सुरक्षा एजेंसी कोर कंपनी के मैनेजर को दिया। इसके अलावा नशेड़ी गार्डों को बाहर किया जाएगा। उन्हें तुरंत ड्यूटी से हटाने का निर्देश दिया गया है। वहीं, परिसर में 150 जगहों पर लाइटें लगवाई जा रही हैं। कार्य दो दिन में पूरा कराने को निर्देश भी दिया गया।
शुक्रवार देर रात परिसर के गेट नंबर चार के पास एमबीबीएस की एक छात्रा के साथ एक सुरक्षा गार्ड ने छेड़खानी कर दी थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स प्रशासन ने आरोपी गार्ड को हटाने और गेट नंबर चार पर तैनात सुपरवाइजर और चार अन्य गार्डों को निलंबित करने का निर्देश परिसर की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसी कोर कंपनी को दिया था। शनिवार को इस पर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई कर दी गई। इसके अलावा परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी गई। इसमें यह बात निकलकर आई कि रात में अस्पताल से मेडिकल कॉलेज रोड होते हुए हॉस्टल तक सन्नाटा रहता है। इसी तरह कॉलेज से लेकर गेट नंबर एक वाले रास्ते पर भी सन्नाटा रहता है। इसे देखते हुए निर्णय लिया गया कि महिला गार्डों के एक ग्रुप की ड्यूटी उन सूनसान इलाकों में भी लगाई जाएगी। वे मेडिकल कॉलेज और हॉस्टल के बीच वाले इलाके में भ्रमण पर रहकर आने जाने वालों पर नजर रखेंगी।
अन्य गार्ड देखते रहे तमाशा
बताया जा रहा है कि जिस वक्त घटना घटी उस दौरान वहां एक सुपरवाइजर और चार अन्य गार्ड भी मौजूद थे। लेकिन, उन आरोपी गार्ड को जाने से उन्होंने नहीं रोका। इन गार्डों ने ड्यूटी में लापरवाही बरती। घटना के बाद सीसीटीवी फुटेज भी रात में ही एम्स प्रशासन ने देखा। इसके बाद शनिवार को गार्ड की तैनाती करने वाली कंपनी को निर्देश दिए कि ऐसे गार्डों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस पर कंपनी ने पांच गार्डों को निलंबित करते हुए उनकी ड्यूटी पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही आरोपी गार्ड को हटा दिया है।
घटना के बाद से सहमी हैं छात्राएं
शुक्रवार रात एमबीबीएस छात्रा के साथ हुई छेड़खानी की घटना के बाद छात्राओं में सुरक्षा को लेकर चिंता सता रही है। छात्राओं का कहना है कि रात के भोजन के बाद अधिकांश छात्राएं परिसर में टहलने निकलती हैं। परिसर हमारे लिए घर की तरह है। इस तरह की घटना के बाद छात्राओं पर ज्यादा पाबंदियां लगाई जाती हैं। गार्ड हमारी सुरक्षा के लिए लगाए गए हैं। अगर वे ही इस तरह के होंगे तो पढ़ाई और ड्यूटी करते समय भी डर लगेगा।
दिनभर कमरे में बंद रही छात्रा
घटना के बाद से ही छात्रा ने खुद को कमरे में बंद कर लिया है। शनिवार को भी उसके दोस्तों ने कमरा खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन उसने दोस्तों से बात नहीं की। बिहार की रहने वाली यह छात्रा पहले से ही अस्वस्थ होने के चलते परेशान रहती थी। ऐसे में इस घटना ने उसे काफी परेशान किया है। छात्रा की दोस्त लगातार उसके साथ संपर्क में बनी हुई हैं।
शोर सुनकर पहुंची थीं छात्राएं
शुक्रवार रात में हुई घटना के संबंध में छात्राओं का कहना था कि रात में भोजन के बाद फोन से बात करते हुए वह टहल रही थीं। इसी बीच पीछे से आकर गार्ड ने अभद्रता करनी शुरू कर दी। छात्रा वहीं बैठकर रोने-चिल्लाने लगी। आवाज सुनकर अन्य छात्राएं और छात्र वहां पहुंचकर उससे पूछने लगे। छात्रा के शांत होने तक मौका पाकर आरोपी गार्ड गेट से बाहर निकल गया। अन्य गार्ड भी घटना के बाद चुपचाप किनारे खड़े रहे।
वर्जन
इस घटना को एम्स प्रशासन ने काफी गंभीरता से लिया है। आरोपी गार्ड को उसकी एजेंसी ने निष्कासित कर दिया है। पांच अन्य गार्डों को भी निलंबित कर दिया गया है। परिसर में महिला गार्डों की समूह में ड्यूटी लगाई जाएगी, जिससे कि भविष्य में ऐसी स्थिति न आने पाए।
अरुण कुमार सिंह, उप निदेशक प्रशासन एम्स
वर्जन
परिसर में लाइट व सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा सुरक्षा गार्डों की स्क्रीनिंग भी कराई जाएगी, जिससे सुरक्षा को लेकर छात्राओं में भरोसा बढ़े।
डॉ. आराधना सिंह, चेयर पर्सन, मीडिया सेल, एम्स