- जताया अंसतोष, 24 घंटे एक वरिष्ठ डॉक्टर के उपस्थित रहने के दिए निर्देश
- ट्रॉमा में बेवजह नहीं रोके जाएंगे मरीज, रेफर नहीं किए तो होगी कार्रवाई
- कार्यकारी निदेशक ने दिए निर्देश, इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के बाद मरीजों को स्थिति के अनुसार वार्ड में किया जाएगा रेफर
गोरखपुर। एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अजय सिंह ने मंगलवार को इमरजेंसी वार्ड का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वार्ड में एक भी वरिष्ठ डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। नाराज कार्यकारी निदेशक ने स्थिति को बेहद गंभीर बताया और वार्ड में 24 घंटे एक वरिष्ठ डॉक्टर के उपस्थित होने का सख्त दिशा निर्देश जारी किया। इसके अलावा कार्यकारी निदेशक ने कहा कि एम्स की इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को अनावश्यक रूप से रोका नहीं जाएगा। मरीज और उसके परिजनों को अनावश्यक रूप से रोकने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बीते दिनों गंभीर रूप से बीमार महिला मरीज को आईसीयू में बेड के इंतजार में इमरजेंसी में तीन दिन से ज्यादा भर्ती किया गया। अंत में आईसीयू में बेड नहीं मिलने के कारण उसे एम्स से रेफर कर दिया गया। इस मामले को लेकर गंभीरता से लेते हुए कार्यकारी निदेशक डॉ अजय सिंह ने सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों और मेडिकल स्टाॅफ के साथ बैठक की थी।
कार्यकारी निदेशक डॉ. सिंह ने ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को अनावश्यक रूप से रोकने के मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किया है। बैठक के दौरान डॉ. सिंह ने कहा कि ट्रॉमा सेंटर जैसी आपातकालीन सेवाओं में मरीजों के समय पर उपचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मरीजों को अधिक देर तक ट्रॉमा सेंटर में नहीं रोका जाएगा। मरीज की स्थिति के आधार पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तत्काल ओपीडी, आईपीडी या आईसीयू में शिफ्ट किया जाएगा। गंभीर रूप से घायल या बीमार मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद ओपीडी, आईसीयू या आईपीडी में रेफर किया जाएगा। मरीजों को एम्स में सुविधा नहीं मिलने पर उन्हें तत्काल रेफर किया जाएगा। अनावश्यक रूप से इमरजेंसी में भर्ती कर उनके स्वास्थ्य के साथ जोखिम नहीं उठाया जाएगा। मंगलवार को निरीक्षण के दौरान कार्यकारी निदेशक ने वार्ड में उपस्थित स्टॉफ से बातचीत की और वार्ड की स्थिति का व्यक्तिगत रूप से जायजा लिया। वार्ड की समस्याओं को सुनने के बाद जल्द ही एक आधिकारिक परामर्श जारी करने का आश्वासन दिया।
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45 बेड की सुविधा, आते हैं रोजाना 70 से 80 मरीज
एम्स की इमरजेंसी विभाग में 45 बेड की सुविधा उपलब्ध है। जबकि प्रतिदिन 70 से 80 मरीज इमरजेंसी में इलाज कराने के लिए आते हैं। एम्स में इलाज के अभाव में देर से रेफर किए जाने के कारण अक्सर मरीजों की मौत को लेकर तीमारदार एम्स प्रशासन पर आरोप लगाते आए हैं।
एम्स : अंदर मरीज परेशान, बाहर कांप रहे तीमारदार
- इमरजेंसी वार्ड में नहीं रहते सीनियर डॉक्टर, इलाज में हो रही दिक्कत
- वार्ड के बाहर बेंच और पेड़ के नीचे बैठे मरीज ठंड से कांपने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एम्स की इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों का इलाज जूनियर डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। इससे इलाज में दिक्कत हो रही है। वहीं उनका इलाज कराने आए तीमारदार ठंड में सर्द हवाओं के बीच बाहर बेंच पर बैठकर कांप रहे हैं। ठंड में उनके लिए न तो अलाव की व्यवस्था की गई है, और न ही बचाव के अन्य कोई प्रयास किए गए हैं।
एम्स में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए तैनात वरिष्ठ डॉक्टर ड्यूटी के दौरान अनुपस्थित रह रहे हैं। गंभीर स्थिति में आए मरीजों की जांच एवं निरीक्षण जूनियर डॉक्टर कर रहे हैं। वरिष्ठ डॉक्टर मरीजों की स्थिति का जायजा लेने के लिए कुछ देर के लिए आ जाते हैं। बाकी समय मरीजों का पूरा इलाज जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ही रहता है। वहीं दूरदराज के मरीजों के साथ आए तीमारदारों के लिए ठंड में सुरक्षित बैठने और इंतजार करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई है। तीमारदारों को दिनभर इमरजेंसी वार्ड के बाहर बैठकर मरीज के ठीक होने का इंतजार करना पड़ता है।
कुछ तीमारदार कुर्सियों के भर जाने के कारण बाहर पेड़ के नीचे बैठकर अपनों के ठीक होने का इंतजार करते हैं। बैठने का स्थान खुला होने के कारण पश्चिम की ओर से तेज ठंड हवा के आने के कारण वह कांपते रहते हैं। उनके साथ आए बच्चों को तो काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तीमारदारों का कहना है कि इमरजेंसी वार्ड के बाहर बरामदे में बैठने पर गार्ड डाटते हैं। वहीं बाहर ठंडी हवा के कारण तबीयत खराब हो जा रही है।