अचानक न्यायिक कार्य बाधित होने से आम वादकारियों को परेशानियों का करना पड़ा सामना
निर्णय वापस नहीं लेने पर अधिवक्ताओं ने अनिश्चित काल तक आंदोलन की दी चेतावनी
गोरखपुर। धारा 144 बीएनएसएस (125 सीआरपीसी) से संबंधित पत्रावलियों को ग्राम न्यायालय में स्थानांतरित किए जाने के विरोध में मंगलवार को भी सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। लगातार दूसरे दिन न्यायिक कार्य बाधित होने से आम वादकारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मंगलवार को एसोसिएशन के सभागार में आयोजित साधारण सभा की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता बार एसोसिएशन अध्यक्ष भानु प्रताप पांडेय ने और संचालन मंत्री गिरिजेश मणि त्रिपाठी ने किया। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर कहा कि धारा 144 बीएनएसएस की पत्रावलियों का ग्राम न्यायालय में स्थानांतरण न्याय व्यवस्था के लिए उचित नहीं है और इससे वादकारियों के साथ-साथ अधिवक्ताओं को भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम न्यायालयों में सुविधाओं का अभाव है। वहां न्यायिक प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित करने के लिए पर्याप्त संसाधन और ढांचा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पत्रावलियों का स्थानांतरण न्यायिक प्रक्रिया को जटिल बना देगा। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि जब तक शासन इस निर्णय को वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सभा में मौजूद अधिवक्ताओं ने एक स्वर में न्यायिक कार्य से विरत रहने का संकल्प दोहराया।
इस दौरान अभिमन्यु पांडेय, उमापति उपाध्याय, सुभाष शुक्ल, जितेंद्र धर दूबे, रवि प्रकाश शुक्ल, राहुल तिवारी, आशीष पांडेय, अजय शुक्ल, प्रवीण शुक्ल, शिव कुमार गुप्ता, डीपी सरोज व अन्य अधिवक्ता उपस्थित रहे।