सहजनवां में मृतका के परिजनों से बात करते विधायक
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एक माह पहले मनबढ़ों के हमले में घायल रणजीति चौधरी (45) की सोमवार की दोपहर में मौत हो गई। उसका इलाज केजीएमयू लखनऊ में चल रहा था, जहां से उसका शव घर भिजवा दिया था। मौत की सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए भिजवाने लगी।
यह देख परिजन आक्रोशित हो गए। सूचना पर पहुंचे विधायक प्रदीप शुक्ला ने लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए जाने दिया। थाना क्षेत्र के सजनापार में 31 मई की रात में मनबढ़ों ने रणजीत चौधरी (45) के ऊपर लाठी से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
पीड़ित के भाई गुड्डू की तहरीर पर पुलिस ने एक नामजद और तीन अज्ञात पर गैर इरादतन हत्या की कोशिश समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया था। पुलिस ने मुख्य आरोपी घनश्याम और एक व्यक्ति को जेल भेज दिया था। हमले के बाद रणजीत बेहोश हो गए थे।
परिजन जिला अस्पताल ले गए, जहां से रेफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन एक निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। वहां हालत में सुधार नहीं होने पर केजीएमयू लखनऊ में इलाज करवा रहे थे। वहां डॉक्टरों ने घर लेकर जाने की बात कही। परिजन घायल को घर लेकर चले आए थे।
पुलिस शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाने लगी तो परिजन विरोध करने लगे। सूचना पर घघसरा नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभाकर दूबे पहुंचे। उन्होंने परिजनों समझाया लेकिन परिजन नहीं माने। फिर क्षेत्रीय विधायक प्रदीप शुक्ल पहुंचे और परिजनों से बात की।
परिजनों ने पुलिस पर केस में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। साथ ही रणजीत की छह नाबालिग बेटियों व पत्नी के पालन-पोषण की बात रखी। इसपर विधायक ने अन्य आरोपियों पर कार्रवाई और परिजनों को सीएम से मिलाने का आश्वासन दिया।