38 लाख से अधिक का मिला अनुदान, पाने वालों में शामिल हैं विज्ञान व मानविकी के शोधार्थी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शोध के क्षेत्र में लगातार नए प्रयास कर रहा हैं। शिक्षकों एवं शोधार्थियों के प्रयासों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने अनुसंधान और विकास योजना के तहत विश्वविद्यालय के 13 अनुसंधान प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसके लिए अनुदान के रूप में कुल 38 लाख 82 हजार 550 रुपये मंजूरी मिली है। इसमें विज्ञान के साथ मानविकी के विषयों के प्रस्ताव भी शामिल हैं।
बता दें कि विश्वविद्यालय की ओर से यह अनुसंधान प्रस्ताव अनुदान के लिए उच्च शिक्षा विभाग को भेजे गए थे। मानक पर खरे उतरने पर विभाग ने अनुदान जारी कर दिया। इसमें इलेक्ट्राॅनिक्स, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, शिक्षा, वाणिज्य, प्राणि विज्ञान और रक्षा अध्ययन जैसे विषय शामिल हैं। इससे पहले विश्वविद्यालय में हो रहे अनुसंधान कार्य को भारत सरकार से भी आर्थिक स्वीकृति मिल चुकी है। पीएम उषा के जरिये 100 करोड़ रुपये की अनुदान राशि प्राप्त हो चुकी है।
अनुदान पालने वाले शोधार्थी, विभाग व विषय
डाॅ. कुसुम रावत (इलेक्ट्राॅनिक्स) : स्व-ऊर्जावान पहनने योग्य इलेक्ट्राॅनिक उपकरणों के लिए कपड़ा-आधारित ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनो जेनरेटर का डिजाइन और विकास।
डाॅ. कामिनी सिंह (रसायन विज्ञान) : औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों के ऑक्सीकरण में पैलेडियम और रूथेनियम की उत्प्रेरक गतिविधि का अध्ययन।
डाॅ. गिरिजेश कुमार वर्मा (रसायन विज्ञान) : औषधीय रूप से महत्वपूर्ण नवीन हेटेरोसाइक्लिक यौगिकों का संश्लेषण।
प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा (रक्षा एवं सामरिक अध्ययन) : उत्तर प्रदेश में आंतरिक सुरक्षा, आपदा एवं नगरीय प्रबंधन में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की भूमिका और चुनौतियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन।
डाॅ. स्मिता सिंह (जैव प्रौद्योगिकी) : युवा महिलाओं में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस संक्रमण और संबंधित जोखिम कारकों का अध्ययन।
डाॅ. मीतू सिंह (शिक्षा विभाग) : उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर और बलरामपुर जिलों में रोजगार वृद्धि के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों के प्रभाव का आकलन।
डाॅ. तूलिका मिश्रा (वनस्पति विज्ञान) : बांस-आधारित फाइटोरिमेडिएशन के माध्यम से भारी धातु मृदा तनाव को कम करने और जलवायु परिवर्तन व सतत आजीविका के समाधान पर शोध।
डाॅ. राजवीर सिंह चौहान (वनस्पति विज्ञान) : गामा-विकिरण प्रेरित काला नमक चावल की उत्परिवर्ती लाइनों का जैव रासायनिक लक्षण-विश्लेषण।
डाॅ. वीरेंद्र कुमार मधुकर (वनस्पति विज्ञान) : गोरखपुर जिले में आवृत बीजी पौधों की विविधता का भू-स्थानिक उपकरणों की सहायता से कर-संबंधी अध्ययन।
डाॅ. सचिन कुमार सिंह (रसायन विज्ञान) : प्राकृतिक जल स्रोतों में आर्सेनिक प्रदूषण का नग्न-नेत्रों से पता लगाने के लिए एक अल्ट्रासेंसिटिव और कम लागत वाली लिक्विड क्रिस्टल-आधारित परीक्षण किट का विकास।
डाॅ. अशोक कुमार (वनस्पति विज्ञान) : गोरखपुर क्षेत्र की कुछ वन्य पौधों के आवश्यक तेलों के कीटनाशक गुणों का अध्ययन और उन्हें दलहन फसलों के कवकीय एवं कीट हानियों से बचाने के लिए फाइटो-प्रिजर्वेटिव के रूप में उपयोग करने पर शोध।
डाॅ. अरुंधति सिंह (प्राणिशास्त्र) : हानिकारक घोंघों के नियंत्रण के लिए कुछ पौधों के मोलस्किसाइड के रूप में सहक्रियात्मक प्रभाव का अध्ययन।
प्रो. मनीष कुमार श्रीवास्तव (वाणिज्य) : सतत पर्यटन विकास के माध्यम से आर्थिक समृद्धि और आजीविका सशक्तिकरण पर शोध।
शोध अनुदान हमारे संकाय सदस्यों की प्रतिबद्धता और विशेषज्ञता को दर्शाते हैं। विश्वविद्यालय एक शोध वातावरण को बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, जो वैज्ञानिक प्रगति और सामाजिक कल्याण में योगदान देता है।
प्रो. पूनम टंडन, कुलपति