सिक्टौर तप्पा हवेली, रानीडीहा, खोराबार उर्फ सूबा बाजार, जंगल सिकरी उर्फ खोराबार, भरवलिया बुजुर्ग, कजाकपुर, बड़गो, मनहट, गायघाट बुजुर्ग, पथरा, बाघरानी, गायघाट खुर्द, सेमरा देवी प्रसाद, गुलरिहा, मुंडिला उर्फ मुंडेरा, मिर्जापुर तप्पा खुटहन, करमहा उर्फ कम्हरिया, जंगल तिकोनिया नंबर-1, जंगल बहादुर अली, नुरुद्दीन चक, चकरा दोयम, रामपुर तप्पा हवेली, सेंदुली बिंदुली, कठवतिया उर्फ कठउर, पिपरा तप्पा हवेली, झरवा, हरसेवकपुर नंबर दो, लक्ष्मीपुर तप्पा कस्बा, उमरपुर तप्पा खुटहन, जंगल हकीम नंबर-2।
इसे भी पढ़ें: प्रत्याशी भी नहीं सहेज पाई सपा, कहीं टिकट के लिए रार, किसी ने लेने से किया इन्कार
इससे पहले 2000 में हुआ था नगर निगम का विस्तार
इससे पहले वर्ष 2000 में नगर निगम का विस्तार हुआ था। उस समय नगर निगम में कुल 60 वार्ड थे। सिंघडिय़ा, झरना टोला, जेल बाईपास शाहपुर, खजांची चौराहा, राप्तीनगर, 10 नंबर बोरिंग, रसूलपुर, नेताजी सुभाष चंद बोस नगर, नदी के किनारे के बांध, महेवा, आजाद चौक, पैड़लेगंज के बीच के क्षेत्र को सन 2000 नगर निगम में शामिल किया गया था।
दायरा बढ़ने से मिला योजनाओं का लाभ
दायरा बढ़ने के बाद गोरखपुर नगर निगम को केंद्र की कई योजनाओं का फायदा मिलने लगा है। दरअसल, 10 लाख से कम जनसंख्या होने की वजह से गोरखपुर नगर निगम को केंद्र सरकार के जवाहर लाल नेहरू नेशनल अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) का लाभ नहीं मिलता था।