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बदल रहा है गोरखपुर: चमचमाया मोती पोखरा..अब मोती झील कहिए, चलेगी बोट- होगा सुंदरीकरण

Mon, 16 Dec 2024 01:34 PM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

मोती पोखरा के पानी को 24 सितंबर से नैनो बबल तकनीक से साफ किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में पोखरों के पानी को शोधित कर स्वच्छ बना रही गुजरात की कंपनी वेलिएंट इंटैक प्राइवेट लिमिटेड ने खुद के खर्चे पर यह जिम्मा उठाया है।
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बशारतपुर का मोती पोखरा झील - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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मोती पोखरा का पानी साफ करवाकर उसे झील की तरह सजा लिया गया है। इसे अब मोती झील भी कहा जा सकता है। नगर निगम यहां अब बोटिंग शुरू कराने की तैयारी है। यहां बैठने के लिए बेंच, आकर्षक लाइटें और खाने-पीने के लिए स्टॉल भी रहेंगे। शहरवासियों को जल्द ही बशारतपुर में भी परिवार संग सैर-सपाटा की जगह मिलेगी।
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मोती पोखरा के पानी को 24 सितंबर से नैनो बबल तकनीक से साफ किया जा रहा है। दक्षिण अफ्रीका में पोखरों के पानी को शोधित कर स्वच्छ बना रही गुजरात की कंपनी वेलिएंट इंटैक प्राइवेट लिमिटेड ने खुद के खर्चे पर यह जिम्मा उठाया है।
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पहले मोती पोखरा ताल ऐसे गंदगी से भरा था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
फर्म ने अपने पेटेंट तकनीक,‘आरईजीएएल’ यानी रेडिकल एन्हांसमेंट यूसिंग गैस असिस्टेड लिक्विड डिस्पर्सन’ का इस्तेमाल कर मोती पोखरा को इतना साफ कर दिया है कि उसके तल में डूबी नाव भी दिखने लगी है। इसमें मछलियां भी बढ़ने लगी हैं। नीचे की तली दिखने लगी है।

नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि मोती पोखरा अब पूरी तरह स्वच्छ हो चुका है। यहां पर नागरिकों के लिए बहुत जल्द बोटिंग की सुविधा उपलब्ध होगी। पोखरे के आसपास पीपीपी मोड पर सुंदरीकरण कराया जाएगा।
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