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गोरखपुर: नगर विधायक ने की मांग, पूर्व सैनिकों को सरकार अपनी सभी नौकरियों में दे दस प्रतिशत आरक्षण

Tue, 18 Feb 2020 12:12 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर

सार

  • नगर विधायक ने सोमवार को विधान सभा में नियम 301 के तहत पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षण का विषय उठाया
  • बोले- हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, कर्नाटक, चंडीगढ़ जैसे प्रदेशों में मिलता है ज्यादा आरक्षण
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नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल। (file) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नगर विधायक ने प्रदेश के पूर्व सैनिकों को उत्तर प्रदेश सरकार की सभी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण की मांग की। सोमवार को विधान सभा में नियम 301 के तहत पूर्व सैनिकों के आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए नगर विधायक डॉ. राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, कर्नाटक, चंडीगढ़ जैसे प्रदेशों में पूर्व यूपी से ज्यादा आरक्षण मिलता है।
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नगर विधायक ने भारत सरकार के रक्षा मामलों की स्थायी समिति के निर्णय के अनुरूप प्रदेश की सभी नौकरियों में कम से कम 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने विषय की गंभीरता को स्वीकार करते हुए सरकार को जवाब देने के लिए निर्देशित किया। नगर विधायक ने कहा कि उत्तर प्रदेश का नौजवान राष्ट्रभक्ति की भावना से भौतिक सुविधाओं, अपने और परिवार के भविष्य की चिंता को छोड़कर भारतीय सेना में शामिल होता है।

सेना को युवा बनाए रखने के लिए जवानों को 35-40 साल की उम्र में सेवानिवृत्ति कर दिया जाता है। देश में सर्वाधिक करीब 10000 सैनिक प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश से सेवानिवृत्त होते हैं। वहीं रिटायर होने के बाद इन पूर्व सैनिकों को बहुत कम आरक्षण दिया जाता है। बताया कि हिमाचल प्रदेश समूह क,ख,ग,घ सभी वर्गों की नौकरियों में पूर्व सैनिकों को 15 प्रतिशत, पंजाब 13, चंडीगढ़ 13, कर्नाटक 10, और हरियाणा के ख वर्ग को 5 प्रतिशत व ग एवं घ वर्ग में 14 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। उत्तर प्रदेश, भारत सरकार के राष्ट्रीय एकीकरण अनुभाग के शासनादेश के तहत क एवं ख वर्ग में 8 प्रतिशत तथा ग एवं घ वर्ग में 3 प्रतिशत आरक्षण देता था।
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लेकिन कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 में उत्तर प्रदेश सरकार ने लोक सेवा आयोग में शारीरिक रूप से विकलांग एवं स्वतंत्रता संग्राम के आश्रितों एवं पूर्व सैनिकों के आरक्षण अधिनियम 1993 में संशोधन करके समूह क एवं ख वर्ग में आरक्षण समाप्त कर दिया। वहीं समूह ग एवं घ में आरक्षण 5 प्रतिशत कर दिया गया। इस 5 प्रतिशत में से पूर्व सैनिकों को सिर्फ  एक प्रतिशत का आरक्षण कर दिया गया।

उन्होंने कहा कि समूह क एवं ख वर्ग में आरक्षण समाप्त होने के बाद वर्ष 2006 में समीक्षा अधिकारी, डिप्टी जेलर, आबकारी निरीक्षक तथा श्रम प्रवर्तन अधिकारी जैसे पद समूह ग से निकाल कर समूह ख में कर दिए गए। इस प्रकार से पूर्व सैनिकों के शिक्षित वर्ग के अधिकार में सिर्फ  क्लर्क ग्रेड की नौकरियां ही रह गईं। भारत सरकार की रक्षा संबंधी स्थायी समिति के सभापति बीसी खंडूरी ने वर्ष 2017 में ही अपनी रिपोर्ट में सभी राज्य सरकार को पूर्व सैनिकों को सभी समूह की नौकरियों में कम से कम 10 प्रतिशत आरक्षण देने की संस्तुति की थी।

राज्य सरकार का यह दायित्व है कि वह, अपने और अपने परिवार की चिंता छोड़कर देश के लिये सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन नौजवानों और उनके परिवार की चिंता करे और स्थायी समिति की रिपोर्ट को पूरी तरह लागू करे। नगर विधायक ने प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री चेतन चौहान से मुलाकात की और उन्हें सारी स्थितियों से अवगत कराते हुए त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया। मंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ से बात करने की बात कही है।
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