चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह का कहना है कि जिन लोगों ने वास्तव में फैक्टरी लगाने के लिए भूखंड लिया है, उन्होंने किस्त भी जमा की है। अगर किसी दिक्कत के चलते कोई उद्यमी किस्त नहीं दे पाया है तो संगठन उसके साथ खड़ा होगा, लेकिन अगर किसी ने जान बूझकर ऐसा किया है तो संगठन से वह कोई उम्मीद न रखें।
गीडा में उद्योग के लिए जमीन का आवंटन कराने करीब 150 उद्यमियों ने अब तक न तो किस्त जमा की है और न ही अपने प्लॉट पर फैक्टरी ही लगाई है। गीडा प्रशासन की तरफ से इन लोगों को नोटिस जारी किया गया है। किस्त जमा नहीं करने वालों का आवंटन निरस्त कर उस प्लॉट को किसी अन्य उद्यमी को आवंटित किया जाएगा।
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पहले गीडा में जमीन का आवंटन कराकर उसे बाद में बेचने का धंधा चल रहा था। नई औद्योगिक नीति के बाद गीडा बोर्ड बैठक में तय हुआ कि आवंटित जमीन को बेचा नहीं जा सकेगा। यूनिट लगाने के बाद दिक्कत है, तभी इसकी बिक्री हो सकती है।
इसके बाद प्लाॅटों की किस्त जमा करने में दिक्कत आने लगी। कुछ ऐसे प्लाॅट हैं, जिनके आवंटन के 15 साल बाद भी गीडा में रकम जमा नहीं की गई है। जिन औद्योगिक भूखंड को 2009 से 2022 के बीच लिया गया है, उनके मामले ही अधिक लंबित हैं। जिन लोगों को नोटिस भेजा गया है, उनमें से 25 से अधिक उद्यमी नोएडा और हरियाणा के हैं।
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चैंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह का कहना है कि जिन लोगों ने वास्तव में फैक्टरी लगाने के लिए भूखंड लिया है, उन्होंने किस्त भी जमा की है। अगर किसी दिक्कत के चलते कोई उद्यमी किस्त नहीं दे पाया है तो संगठन उसके साथ खड़ा होगा, लेकिन अगर किसी ने जान बूझकर ऐसा किया है तो संगठन से वह कोई उम्मीद न रखें।
भूखंड आवंटन के बाद भी काफी संख्या में उद्यमियों ने किस्त की राशि अदा नहीं की है। इनमें से ही कुछ ऐसे भी हैं, जिन्होंने समय विस्तार देने के बाद भी फैक्टरी की स्थापना नहीं की है। उन सभी को अंतिम नोटिस जारी की गई है। इसके बाद भूखंड का आवंटन निरस्तीकरण समेत नियमानुसार अन्य कार्रवाई की जाएगी: अनुज मलिक, सीईओ, गीडा